ख़ास आवाज़ से शिकार चुराते हैं चमगादड़

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चमगादड़ों की एक प्रजाति अपने प्रतिद्वंद्वी चमगादड़ से उसका शिकार 'चुराने' के लिए अलग तरह की ध्वनि निकालती है.

चमगादड़ अपने शिकार को जैसे ही लपकने वाला होता है कि तभी एक ध्वनि उसे रास्ते से भटका देती है और उसका निशाना चूक जाता है.

प्रतियोगी चमगादड़ जो ध्वनि निकालता है उससे वह शिकार को अपने नियंत्रण में लेने में कामयाब हो जाता है.

विज्ञान पत्रिका में छपी वैज्ञानिकों की टीम की रिपोर्ट के अनुसार मैक्सिकन का बिना पूंछ वाले चमगादड़ का ऐसा व्यवहार पहली बार देखने में आया है.

इकोलोकेशन प्रक्रिया

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Image caption चमगादड़ों की आवाज सुनने के लिए अल्ट्रावॉयलेट लाइट टावर और माइक्रोफोन लगाए गए.

आमतौर पर चमगादड़ अंधेरे में शिकार को खोजने और फिर उस तक पहुंचने के लिए मुंह से तेज़ गति की ध्वनि तरंगे निकालता है. इसे 'एकोलोकेशन' प्रक्रिया कहते हैं.

जैसे जैसे शिकार नज़दीक आता जाता है ये तरंगे तेज़ हो जाती हैं. आमतौर पर अंधेरे में शिकार करने या एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए चमगादड़ इन मुंह से ये आवाज़ें निकालते हैं.

नए शोध के मुताबिक़ कोई प्रतियोगी चमगादड़ एक ख़ास क़िस्म की ध्वनि की मदद से सफलतापूर्वक रास्ते से हटाते हुए बीच में ही शिकार लपक लेता है.

शोध की अगुआई करने वाले उत्तरी कैरोलाइना के वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी के आरोन कोरकोरन ने बीबीसी को बताया, "एक चमगादड़ मुंह से तेज़ ध्वनि तरंगें निकालता हुआ अपने शिकार तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था. दूसरा चमगादड़ एक अलग तरह की ध्वनि तरंगे निकालता हुआ पहले चमगादड़ को बीच में रोकने की कोशिश करता दिखा."

उन्होंने बताया कि जब भी दूसरे चमगादड़ ने टोकने वाली आवाज़ निकाली, पहले चमगादड़ के हाथ से शिकार निकल गया.

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