दुखी लोगों पर नज़र रखने वाली ऐप पर रोक

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आत्महत्या के रुझान की जानकारी देने वाली ऐप 'समेरिटंस राडार' बंद कर दी गई है.

इसे समेरिटंस कंपनी ने तैयार किया है और कुछ 'गंभीर' चिंताओं की वजह से बंद किया गया है.

इस ऐप के ज़रिए ट्विटर पर उन लोगों का पता लगाया जाता था, जिनमें आत्महत्या करने के रुझान के संकेत मिलते थे.

समेरिटंस कंपनी के नीति निदेशक ज़ो फर्न्स ने बताया, "हमारी मुख्य चिंता उन लोगों से जुड़ी है जो मानसिक अवसाद से उबरने की कोशिश कर रहे हैं."

ब्रिटेन का समेरिटंस एक सामाजिक संगठन है, जो अकेलेपन और अवसाद से पीड़ित लोगों की मदद करता है. परेशान महसूस कर रहे लोगों का जब किसी से बात करने का मन होता है तो वो समेरिटन में फ़ोन कर सकते हैं.

समेरिटंस के ऐप में कुछ ख़ास तरीक़े से उन शब्दों और मुहावरों की पहचान की जाती है जिससे किसी व्यक्ति के दुखी होनी की पहचान होती थी.

लोगों की आपत्ति

कुछ लोगों का कहना है कि मानसिक समस्या से जूझ रहे लोगों को इस ऐप ने पहले से ज़्यादा असुरक्षित और कमज़ोर बनाया है.

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पिछले महीने लॉन्च हुई समेरिटंस रडार ऐप ने ट्विटर अकाउंटों का आकलन "टायर्ड ऑफ बीईंग अलोन", "हेट माईसेल्फ़", "डिप्रेस्ड", "हेल्प मी" और "नीड समवन टू टॉक टू" जैसे मुहावरों के ज़रिए किया.

जिन यूज़रों ने इसके लिए साइन अप किया है, उनके ट्विटर मित्रों में से किसी के अवसादग्रस्त लगने वाले ट्वीट करने पर उन्हें ईमेल अलर्ट मिल जाया करेगा.

समेरिटंस राडार ने केवल उन ट्वीट की ही निगरानी की जो सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध थे. इसके बावजूद लोगों को इस आकलन से परेशानी महसूस हुई.

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