धूमकेतु पर ड्रिलिंग शुरू... लेकिन कब तक?

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धूमकेतु 67/पी पर फ़िलाई लैंडर ने ड्रिल करने की कोशिश शुरू कर दी है, हालांकि यह डर भी है कि इसकी बैटरी कुछ ही घंटों में ख़त्म हो जाएगी.

यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) में शोधकर्ताओं का कहना है कि लैंडर के पलटने के ख़तरे के बावजूद उपकरणों को अधिकतम सीमा तक इस्तेमाल किया जा रहा है.

वैज्ञानिकों को उम्मीद हे कि रोबोट की ऑनबोर्ड लैब में विश्लेषण के लिए वह कुछ सैंपल हासिल करने में कामयाब हो जाएंगे.

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लेकिन अगर बैटरी ख़त्म हो गई तो इनके परिणामों को वापस धरती तक नहीं पहुंचाया जा सकेगा.

'सूर्य की रोशनी कम'

फ़िलाई लैंडर के मैनेजर स्टीफ़न उलामेक ने कहा, "हम ड्रिल से सैंपल हासिल करने में कामयाब रहते हैं या नही, यह कुछ समय बाद पता लेगा."

"ऐसा हो पाया तो यह बहुत अच्छा होगा लेकिन शायद जब तक फिर संपर्क कर पाएं उससे पहले ही बैट्री ख़त्म हो जाएगी."

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ईएसए का कहना है कि लैंडर पर लगे सोलर पैनलों को सूर्य की रोशनी कम मिल रही है और यह इतनी नहीं है कि शनिवार के बाद भी काम करता रह सके.

67पी धूमकेतु पृथ्वी से लगभग 50 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और इसकी परिधि दो किलोमीटर की है.

यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने 2004 में अभियान को इस उम्मीद में शुरू किया था कि इससे हमारे सौरमंडल की उत्पत्ति के बारे में जानने में मदद मिलेगी.

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