चिलीः फ़ॉर्मूला 1 सोलर कारों की रैली

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चिली में एक रैली में 20 टीमें एक ऐसी रैली में भाग ले रही हैं जिसमें सभी कारें सौर ऊर्जा चालित हैं, इनका कार्बन उत्सर्जन शून्य है.

सौर अटाकामा रैली पिछले कुछ साल में शुरू हुई ऐसी प्रतियोगिताओं में से एक है.

सौर प्रतियोगिताएं बढ़ रही हैं, सौर कारों की स्पीड भी बढ़ रही है तो क्या भविष्य सौर कारों का है? पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट

सामान्य कार क़त्तई नहीं

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चिली रेस के एक निर्णायक और नॉर्थ अमरीकी सोलर चैलेंज, जो दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित सौर रैलियों में से एक है, के निदेशक डैन एबेर्ले कहते हैं, "ये हर ओर फैल रही हैं. ऑस्ट्रेलिया, अबु धाबी, दक्षिण अफ़्रीक़ा, मोरक्को, साइप्रस और तुर्की और अब चिली में भी".

चिली रैली में प्रतिभागियों को अटाकामा रेगिस्तान से होते हुए 1400 किलोमीटर से लंबी यात्रा करनी होती है. यह दुनिया के सर्वाधिक सौर प्रकाश वाली जगहों में से एक है.

यह रास्ता ज्वालामुखियों और एंडस पहाडों की बर्फ़ ढकी चोटियों के नज़ारों के बीच से गुज़रता है. परंपरागत रैलियों के विपरीत इस रैली में ड्राइवर सामान्य पक्की सड़कों पर से गुज़रते हैं- अक्सर अन्य वाहन निर्माताओं को अचंभित करते हुए.

सबसे तेज़ कार 140 किलोमीटर/प्रतिघंटा की स्पीड तक पकड़ लेती है लेकिन चूंकि यह रैली चिली की आम सड़कों पर होती है इसलिए उन्हें अधिकतम गतिसीमा का भी ध्यान रखना पड़ता है.

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दुनिया की अग्रणी टीमों में से एक जापान की टोकाई विश्वविद्यालय में शामिल सऊदी ड्राइवर अब्दुल रहमान अल्ख़तीब कहते हैं, "चिली सौर प्रकाश के लिए दुनिया में सबसे अच्छी जगह है इसलिए हम यहां आना चाहते थे".

अल्ख़तीब कहते है कि सौर कार चलाना किसी सामान्य कार को चलाने जैसा कतई नहीं होता, "इसमें पावर स्टीयरिंग नहीं होता और कार इतनी हल्की होती है कि हवा का एक झोंका आपको ट्रैक से बाहर कर सकता है."

"आप ज़मीन के बहुत नज़दीक होते हैं इसलिए आपको सड़कों पर गड्ढों और मोड़ों का बहुत देर में पता चलता है इसलिए आपको बहुत जल्दी प्रतिक्रिया देनी पड़ती है".

कार सूर्य की रोशनी को बिजली में बदलने के लिए फ़ोटोवोल्टिक सेलों का इस्तेमाल करती है, जिससे या तो सीधे मोटर को पावर दी जा सकती है या फिर बैटरी को चार्ज किया जा सकता है.

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पिछले कुछ सालों में इसकी तकनीक कई गुना रफ़्तार से बढ़ी है.

'बहुत ख़ास कारें'

एबेर्ले कहते हैं, "जिस पहली कार को बनाने में मैंने मदद की थी वह सूर्य की पूरी रोशनी में 24 किमी/घटां की रफ़्तार से चलती थी. अब कुछ कारें 100 किमी/घटां से तेज़ दौड़ सकती हैं".

"सौर सेल पहले से बेहतर हैं. 1984 में हम जिन सेलों को इस्तेमाल करते थे वह सिर्फ़ 14 फ़ीसदी कारगर थे. अब यह क़रीब दोगुने सक्षम हैं".

ऑस्ट्रेलिया में विश्व सौर प्रतियोगिता के इवेंट डायरेक्टर क्रिस सेलवुड कहते हैं कि सौर कारों में इस्तेमाल होने वाली बैट्रियों का वज़न काफ़ी कम हुआ है.

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तो, तकनीक के इतनी तेज़ी से बेहतर होते जाने से सोलर कारों का भविष्य क्या है? क्या हम जल्द ही इन कारों में एक शहर से दूसरे शहर जाएंगे? क्या हमारी गाड़ियों के ऊपर सौर पैनल लगे होंगे?

ज़्यादातर पर्यवेक्षकों को लगता है, नहीं.

इस बात की बहुत गुंजाइश है कि हम इलेक्ट्रिक कार इस्तेमाल करेंगे जो लिथियम बैट्रियों से चलेंगी, इसके लिए ऊर्जा चाहे किसी भी स्रोत से मिलती हो, सूरज से भी.

सेलवुड कहते हैं, "दुनिया में ज़्यादातर लोग एक दिन में 40 किलोमीटर से ज़्यादा यात्रा नहीं करते और यह एक इलेक्ट्रिक कार की क्षमता में है, जो गैराज की छत पर लगे सौर पैनलों से ऊर्जा ले सकती है."

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"आपको कार पर पैनल लगाकर घूमने की ज़रूरत नहीं है."

अटाकामा सोलर रैली के निदेशक लीन्ड्रो सहमत हैं. वह कहते हैं, "चिली में जो कारें आप देख रहे हैं वह इलेक्ट्रिक कारों की फ़ॉर्मूला 1 कारें हैं. यह बहुत ख़ास हैं".

"लेकिन वैसे इलेक्ट्रिक कारों का भविष्य उज्जवल है. मुझे लगता है कि चिली और दुनिया की अन्य जगहों में तीन साल के अंदर और इलेक्ट्रिक कारें दिखने लगेंगी."

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