कितना स्मार्ट है लेनोवो का ए-7000

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चीन की कंपनी लेनोवो का नया स्मार्टफ़ोन ए-7000 आज भारत में लॉन्च हो गया है.

कंपनी के मुताबिक ये पहला एंड्रॉयड फ़ोन है जो डॉल्बी एट्मॉस तकनीक का इस्तेमाल करेगा यानी इसमें साउंड सिस्टम का अनुभव डॉल्बी होम थिएटर जैसा होगा. इस फ़ोन को हाल ही में स्पेन के बार्सिलोना में हुई मोबाइल वर्ल्ड कांग्रेस में 169 डॉलर यानी करीब दस हज़ार रुपए में लॉन्च किया था.

लेकिन भारत में इसे महज़ 8,999 रुपए के दाम पर लॉन्च किया गया है.

इस फ़ोन में 5.5 इंच का एचडी डिस्प्ले है जिसमें अल्ट्रा वाइड व्यूइंग एंगल हैं. ये फो़न 7.9 मिलिमीटर पतला है और इसका वज़न महज़ 140 ग्राम है.

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ब्लैक और पर्ल व्हाइट के दो रंगों में उपलब्ध इस फ़ोन में ऑटो-फ़ोकस के साथ आठ मेगापिक्सल का रियर कैमरा है जबकि फ्रंट कैमरा पांच मेगापिक्सल है.

इसमें आठ जीबी की स्टोरेज है जो 32 जीबी तक बढ़ाई जा सकती है और बैट्री की क्षमता 2900 एमएएच है.

ए-7000 में 1.5 गीगाहर्ट्ज़ का ओक्टा-कोर प्रोसेसर है जिसकी रैम दो जीबी की होगी. साथ ही ये फ़ोन 4जी कंपैटिबल है और इसमें दो सिम डाली जा सकती हैं.

लेनोवो का दावा है कि इससे पहले लॉन्च किए गए स्मार्टफ़ोन ए-6000 के तीन लाख हैंडसेट भारत में बिक चुके हैं.

'कुछ नया करने का दबाव'

लेकिन गैजेट विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में इस दाम में उपलब्ध मोबाइल के फ़ीचर भी लगभग ऐसे ही हैं. लेकिन हां, ए-7000 की ऑडियो डॉल्बी एट्मॉस तकनीक पर कंपनी ने लॉन्च के दौरान बहुत ज़ोर डाला.

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टेक समीक्षक माला भार्गव ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "हालांकि डॉल्बी एट्मॉस तकनीक यूनिक है, लेकिन ये केवल तब कामयाब है जब आप हेडफ़ोन के साथ इस मोबाइल पर ऑडियो सुनेंगे. बिना हेडफ़ोन के साउंड क्वालिटी उतनी उभर कर नहीं आती है. आजकल 4जी सेल्फ़ी कैमरा, एंड्रायड फ़ोन और अच्छी बैटरी लाइफ़ जैसे फ़ीचर हर ब्रैंड के सस्ते फ़ोन में उपलब्ध हैं. तो मोबाइल कंपनियों पर बहुत दबाव है कि वे अपने नए मॉडल में कुछ ऐसा फ़ीचर डालें जो औरों से अलग हो."

उन्होंने बताया कि 9000 रुपए की क़ीमत में बाज़ार में माइक्रोमैक्स, आसुस और शिओमी के ऐसे कई मॉडल मौजूद हैं जो लगभग इसी तरह के या इससे बेहतर फ़ीचर दे रहे हैं. उनका कहना था कि जब कोई कंपनी सस्ते दाम में इतने सारे फ़ीचर उपभोक्ता को देती है तो उन्हें दूसरे फ़ीचर्स में थोड़ा समझौता करना पड़ जाता है जैसे कि स्क्रीन रेज़ोल्यूशन और प्रोसेसर.

माला भार्गव ने बीबीसी को बताया कि भारतीय मोबाइल बाज़ार में माइक्रोमैक्स ने सबसे पहले कम दाम में कई फ़ीचर्स देने का चलन शुरू किया था जिसके बाद मोटोरोला, शिओमी और लेनोवो जैसी कंपनियों के बीच इसी बात की होड़ लग गई जिसका सीधा फ़ायदा मोबाइल उपभोक्ताओं का हुआ.

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