विरोध के बावजूद इंटरनेट डॉट ओरआरजी का विस्तार

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Image caption फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग.

फ़ेसबुक के मार्क ज़करबर्ग ने अपनी इंटरनेट डॉट ओआरजी पहल का विस्तार करने का ऐलान किया है.

सोशल मीडिया साइट के इस कदम को नेट न्यूट्रैलिटी के ख़िलाफ़ बताते हुए इसका भारत और कई अन्य जगहों में भी भारी विरोध हो रहा है.

इंटरनेट डॉट ओआरजी अपने साझीदार मोबाइल नेटवर्क के सब्सक्राइबर्स को कुछ ऑनलाइन साइटों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क दिए इस्तेमाल करने की सुविधा देता है.

इसके लिए लोगों को ख़ास एंड्रॉएड ऐप, इंटरनेट डॉट ओआरजी वेबसाइट, फ़ेसबुक के अपने एंड्रॉएड ऐप या ओपरा मिनी ब्राउज़र का इस्तेमाल करना होगा.

इसका विरोध सेव दि इंटरनेट डॉट इन से जुड़े निखिल पाहवा कहते हैं, "फ़ेसबुक डॉट ओआरजी की प्रतियोगी प्रवृत्ति को देखते हुए अगर मेरा प्रतियोगी उस पर है तो मैं भी उस पर जाने को मजबूर हो जाऊंगा."

'कुछ सेवाएँ मिलेंगी'

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साल 2014 में यह परियोजना ज़ाम्बिया, भारत, इंडोनेशिया, ग्वाटेमाला, तंज़ानिया, केन्या, घाना, फ़िलीपीन्स और इंडोनेशिया में शुरू की गई थी. अब तक यह हर देश में कुछ सेवाओं तक ही सीमित थी.

इनमें विकीपीडिया एनसाइक्लोपीडिया, संयुक्त राष्ट्र बाल निधि की जीवन स्वास्थ्य साइट, बीबीसी न्यूज़, फ़ेसबुक और कुछ चुनिंदा स्थानीय समाचार और खेल परिणामों की साइट्स हैं.

लेकिन अब इस परियोजना का विस्तार कर अन्य डेवलपर्स से भी इंटरनेट डॉट ओआरजी प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने का आह्वान किया गया है.

वीडियो संदेश

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इंटरनेट डॉट ओआरजी वेबसाइट पर डाले गए एक वीडियो संदेश में फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग ने कहा, "पूरे इंटरनेट को मुफ़्त में उपलब्ध करवाना व्यावहारिक नहीं है."

उनका मानना है, "लेकिन यह संभव है कि मूलभूत सेवाएँ जो कम डाटा लेती हों, और सस्ते फ़ोन पर भी काम कर सकें, आसानी से दिया जा सके."

लेकिन फ़ेसबुक के इस कदम को नेट न्यूट्रेलिटी के विरुद्ध बताते हुए इसका विरोध जारी है.

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