मज़बूत 'अल नीनो प्रभाव' की आशंका

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मौसम वैज्ञानिकों ने सूखे और बाढ़ के लिए ज़िम्मेदार 'अल नीनो प्रभाव' के सक्रिय रहने की आशंका जताई है.

ऑस्ट्रेलिया के ब्यूरो ऑफ़ मेटेरोलॉजी ने अनुमान लगाया है कि इस साल के अंत तक यह ‘मजबूत’ असर पैदा कर सकता है.

अल-नीनो एक ऐसी मौसमी परिस्थिति है जो प्रशांत महासागर के पूर्वी भाग यानी दक्षिणी अमरीका के तटीय भागों में महासागर के सतह पर पानी का तापमान बढ़ने की वजह से पैदा होती है.

इसकी वजह से मौसम का सामान्य चक्र गड़बड़ा जाता है और बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएँ आती हैं.

भारत में अल नीनो की वजह से मानसून कमज़ोर रह सकता है.

पूर्वानुमान के अनुसार अल नीनो अभी भी अपने शुरुआती चरण में है. लेकिन इसमें पूरी दुनिया में मौसम को खतरनाक बनाने की बहुत अधिक क्षमता है.

प्राकृतिक चक्र

हालांकि अमरीकी वैज्ञानिकों ने पिछले मार्च में ही इसके पहुंचने की घोषणा कर दी थी, लेकिन तब इसे ‘कमज़ोर’ बताया गया था.

आस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने कहा है कि आगामी सितम्बर से इसके प्रभाव में तेजी आ सकती है.

'ब्यूरो ऑफ़ मेटेरोलॉजी' में मौसम निगरानी और पूर्वानुमान के मैनेजर डेविड जोन्स ने कहा, “यह बक़ायदा अल नीनो प्रभाव है और यह कमज़ोर नहीं है.”

उन्होंने कहा, “आकलन कहता है कि इस बार अल नीनो प्रभाव काफ़ी मजबूत रहने वाला है.”

असल में प्राकृतिक चक्र के हिस्से के रूप में यह प्रभाव हर दो से सात साल पर आता रहता है.

ज़रूरत से ज़्यादा ठंड

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वैज्ञानिक सतह का तापमान, जल धाराओं और हवा के बारे में जानकारी जुटाने के लिए उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में एक तैरता हुआ उपकरण संचालित करते हैं.

इसके अलावा सैटेलाइट और अन्य मौसम संबंधी जानकारियों को कंप्यूटर में डाला जाता है.

पांच साल पहले आए अल नीनो प्रभाव को दक्षिण एशिया में कम़जोर मानसून और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया, फ़िलिपींस व इक्वाडोर, अमरीका में बर्फीले तूफ़ान के लिए ज़िम्मेदार माना गया था.

इसके अलावा ब्राज़ील में भयंकर लू और मैक्सिको में बाढ़ के पीछे भी अल नीनो को ही कारण माना गया.

सूखे और बाढ़ की आशंका

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रीडिंग विश्वविद्यालय में डिपार्टमेंट ऑफ़ मेटेरोलॉजी के प्रोफ़ेसर एरिक गुलयार्डी का कहना है कि अल नीनो के प्रभाव की आशंका तो गंभीर है लेकिन यह कितना बड़ा है, इसके बारे में गर्मियों में ही पता चल पाएगा.

ये प्रभाव दुनिया के अलग अलग हिस्सों में ख़राब मौसम के लिए ज़िम्मेदार हैं. यही प्रभाव दक्षिण पश्चिम अमरीका में सर्दियों में बारिश और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में सूखा ला सकता है.

जहां तक यूरोप की बात है, तो यहां अल नीनो का क्या और कैसा असर होगा ये बहुत साफ नहीं है.

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान लगातार बढ़ने के कारण अल नीनो प्रभाव की संभावना और बढ़ेगी.

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