'नाती को जन्म नहीं दे सकती महिला'

रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस

लंदन में हाईकोर्ट ने अपने एक फ़ैसले में कहा है कि कोई मां अपनी मृत बेटी के सुरक्षित रखे अंडाणुओं का इस्तेमाल नाती को जन्म देने के लिए नहीं कर सकती.

ब्रिटेन में 59 साल की एक महिला इस सिलसिले में अमरीका जाकर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट कराना चाहती थी.

लेकिन ब्रिटेन में फ़र्टिलिटी रेग्यूलेटर ने इस महिला को ऐसा करने की अनुमति नहीं दी थी.

उनका कहना था कि महिला की मृतक बेटी ने इस संबंध में पूरी तरह से सहमति नहीं दी थी.

इसे अपनी तरह का पहला मामला माना जा रहा है.

'पर्याप्त प्रमाण नहीं'

ह्यूमन फर्टिलाइजेशन एंड एम्ब्रियोलॉजी अथॉरिटी (एचएफईए) ने बीते साल कहा था कि इस बात के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं जो ये साबित करें कि बेटी अपने अंडाणुओं का इस्तेमाल उसी तरह चाहती थी जैसा उसकी मां करने जा रही है.

बेटी की इच्छा थी कि उसके अंडाणुओं को मौत के बाद इस्तेमाल करने के इरादे से सुरक्षित रखा जाए.

लेकिन उन्होंने इस आशय के फॉर्म में ये नहीं लिखा था कि इन अंडाणुओं का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा.

हाईकोर्ट के जज जस्टिस आउस्ली ने कहा, ''मैं इस दावे को ख़ारिज करता हूं. हालांकि इससे दावेदारों को दुख होगा जो अपने बाद अपना कोई ज़िंदा देखने की अपनी बेटी की अंतिम इच्छा पूरी करना चाहते थे.''

अंडाणु की मांग करने वाले माता-पिता की प्रतिनिधि जेनी रिचर्ड्स ने अदालत के फैसले पर निराशा जताई है.

अब महिला इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ ऊंची अदालत में अपील कर सकती है.

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