चार्जर को लेकर चक्कर में न पड़िए

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क्विक, रैपिड, अडाप्टिव, टर्बो, सुपरफ़ास्ट...अपने फ़ोन को आप इनमें से किस चार्जर से चार्ज करना चाहेंगे?

अगर फ़ोन को चार्ज ही करना है तो इतने तरह के चार्जर की आखिर ज़रुरत क्या है?

इन सब में कोई फ़र्क़ भी है या नहीं? अगर चार्जर खरीदना है तो कोई ज़रूरी नहीं है कि ब्रांडेड चार्जर ही खरीदा जाए.

क्विक चार्जर आपकी बैटरी में ज़रूरत से ज़्यादा बिजली देकर सेचुरेशन प्वाइंट यानी 60-80 फ़ीसदी चार्ज तक पहुँचा देता है.

इसके बाद बैटरी को 100 फीसदी चार्ज होने में थोड़ा समय लगता है.

इसी को सैमसंग और कुछ दूसरी कंपनियां अडाप्टिव पावर कहती हैं.

ये जानना ज़रूरी है कि आपका फ़ोन क्विक चार्जिंग को सपोर्ट करता है या नहीं.

नई तकनीकी नया तरीका

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2013 और 2014 में बने कई फ़ोन जैसे गैलेक्सी S5, नोट-3, नेक्सस-5 क्विक चार्ज 1.0 के हिसाब से बनाए गए थे.

उसके बाद से चार्जिंग टेक्नोलॉजी बेहतर हुई है और अब फ़ोन क्विक चार्ज 2.0 के साथ आ रहे हैं.

क्विक चार्ज 1.0 वाले फ़ोन में अगर क्विक चार्ज 2.0 लगाएंगे तो आपका फ़ोन तेज़ी से चार्ज होगा.

मोटोरोला नेक्सस-6 को आप क्विक चार्ज 2.0 वाले चार्जर से उसी रफ़्तार से चार्ज कर सकते हैं जैसे सैमसंग के किसी स्मार्टफ़ोन को.

नया चार्जर लें या नहीं

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तो रहा वही सवाल - आखिर क्विक, रैपिड, अडाप्टिव, टर्बो और फ़ास्ट चार्जर में फ़र्क़ क्या है?

जवाब सीधा है - ये सभी कंपनियों के मार्केटिंग का तरीका है, नए-नए नाम रखना जैसे बाज़ार में पचास तरह के टूथपेस्ट हैं वैसे ही ये चार्जर भी हैं.

चार्जर पर ज़्यादा पैसे खर्च करना बिल्कुल भी ज़रूरी नहीं है.

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