अनियमित नींद से कैंसर का ख़तरा !

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चूहों पर किए गए परीक्षणों से 'स्पष्ट तौर पर' पता चला है कि नींद के अनियमित पैटर्न से कैंसर की आशंका बढ़ जाती है, एक अध्ययन से ऐसे संकेत मिले हैं.

' करंट बायोलॉजी' में प्रकाशित इस शोध रिपोर्ट से इस विचार को बल मिला है कि शिफ़्ट में काम करने वालों की सेहत पर अनियमित नींद का ख़राब असर पड़ता है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि जिन महिलाओं के परिवार में स्तन कैंसर होेने का ख़तरा है उन्हें शिफ़्ट में कभी काम नहीं करना चाहिए.

हालांकि रिपोर्ट में इसके लिए लोगों पर टेस्ट किए जाने की ज़रूरत बताई गई है.

वज़न बढ़ने का ख़तरा भी

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आंकड़ों से ये भी पता चला कि जिन चूहों का नींद का पैटर्न अनियमित था वे सामान्य खाना खाने के बावजूद 20 फीसदी ज़्यादा भारी थे.

अध्ययनों से अक्सर ये संकेत मिले हैं कि शिफ्ट में काम करने वालों और फ्लाइट अटेंडेंट्स में स्तन कैंसर का ज्यादा ख़तरा होता है.

इस बारे में एक तर्क यह है कि शरीर की अंदरूनी लय या बॉडी क्लॉक को अस्त-व्यस्त करने से इस बीमारी का ख़तरा बढ़ जाता है.

बहरहाल, कैंसर और नींद का ये संबंध अनिश्चित है, क्योंकि हो सकता है कि जो लोग शिफ्ट में काम करते हैं उनका सामाजिक वर्ग, गतिविधियों का स्तर अलग होता हो या उनको मिलने वाली विटमिन डी की मात्रा अलग होती हो.

बॉडी क्लॉक

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जिन चूहों में स्तन कैंसर होेने का ख़तरा था, उनकी बॉडी क्लॉक एक साल तक हर हफ़्ते बारह घंटे पीछे हुई थी.

सामान्य तौर पर पचास हफ्तों में उन्हें ट्यूमर होते थे लेकिन उनकी नींद में जब लगातार बाधा डाली गई तो ट्यूमर आठ हफ्ते पहले ही उभर आए.

ब्रिटेन की मेडिकल रिसर्च काउंसिल के डॉक्टर माइकल हेस्टिंग्स ने बीबीसी को बताया, "मैं मानता हूं कि चूहों के मॉडल में किया गया यह अध्ययन प्रयोग पर आधारित एक स्पष्ट सबूत है कि बॉडी क्लॉक में बाधा डालने से स्तन कैंसर अपेक्षाकृत तेज़ी से विकसित होता है."

वह कहते हैं कि लोगों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, "अपने वज़न का ख्याल रखें, स्तनो की जांच पर ध्यान दें और नियोक्ता कार्यस्थल पर ही हेल्थ चेकअप करवाएं."

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