'ख़त्म हो जाएंगे एक तिहाई कैक्टस'

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एक शोध में कहा गया है कि कैक्टस की एक तिहाई प्रजातियों पर लुप्त होने का ख़तरा मंडरा रहा है.

यह पौधे सूखे क्षेत्रों के पारिस्थिकी का एक महत्वपूर्ण तत्व हैं जो बहुत से जानवरों को खाना और पानी उपलब्ध करवाते हैं.

इंटरनेशनल यूनियन फ़ॉर कन्ज़र्वेशन ऑफ़ नेचर के शोध के ये नतीजे नेचर प्लांट्स जरनल में प्रकाशित हुए हैं.

47% प्रजाति पर ख़तरा

इस शोध के अनुसार कैक्टस की 1480 प्रजातियों में से 31 प्रतिशत पर ख़तरा आदमी के कारण - जैसे कि ग़ैरक़ानूनी व्यापार, कृषि और मछली पालन के साथ ही भूमि प्रयोग बदलने से है.

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आईयूसीएन के कैक्टस और गूदेदार पौधों के विशेषज्ञ समूह की सह-अध्यक्ष बारबरा गोएट्टेश इस शोधपत्र की सह लेखक हैं.

वह कहती हैं, "हमें कैक्टस पर इतने बड़े ख़तरे का और इसके लिए ग़ैरक़ानूनी व्यापार का एक बड़ा कारण होने का अंदाज़ नहीं था."

शोध का अनुमान है कि ख़तरे में आई 47 प्रतिशत प्रजातियों पर ख़तरे की वजह पौधों और बीजों का बागवानी उद्योग और निजी संग्रह के लिए ग़ैरक़ानूनी व्यापार और असुरक्षित खेती है.

कैक्टस की बहुत सारी प्रजातियों को संग्रहकर्ता उनके ख़ूबसूरत फूलों के लिए चाहते हैं और आधी प्रजातियों का खाने और दवा के स्रोत के रूप में प्रयोग किया जाता है.

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गर्म और सूखे स्थानों पर उगने वाला कैक्टस जहां बहुत कम पौधे हो सकते हैं पारिस्थिकी तंत्र को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

जो जानवर खाने और पानी के लिए कैक्टस को इस्तेमाल करते हैं उनमें हिरन, कोयोटी, छिपकलियां और कछुए शमिल हैं. इसके बदले ये जानवर इन पौधों के बीज को फैलाने में मददगार होते हैं.

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