ऐसे बदला जाता है इंसान का पूरा चेहरा...

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एक घर में लगी आग से एक महिला को बचाने की कोशिशों में अग्निशमन कर्मचारी पैट्रिक हार्डिसन का चेहरा बुरी तरह चल गया था.

उनके कान, भौहें, सिर के बाल और रोशनी सभी कुछ छिन चुका था और वो पहचान में नहीं आ रहे थे.

उनके दोस्त पैट्रिक को फ़ेस ट्रांसप्लांटेनशन (चेहरे का प्रत्यारोपण) के क्षेत्र में जाने पहचाने डॉक्टर अडवार्डो रॉडरिगेज के पास ले गए.

पिछले अगस्त में उन्होंने दुनिया के अबतक के सबसे जटिल फ़ेस ट्रांसप्लांट सर्जरी को अंजाम दिया.

अभी हार्डिसन की हालत में लगातार सुधार हो रहा है और नतीजे के बारे में आंकलन करना थोड़ी जल्दबाजी होगी लेकिन यह सुधार काफी चमत्कारिक है.

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लेकिन इस सफलता के पीछे दशकों के प्रयोग, बहादुरी और कड़ी मेहनत की बहुत बड़ी भूमिका रही है.

साल 2005 में दुनिया का पहला फ़ेस ट्रांसप्लांट एक फ़्रांसीसी महिला इज़ाबेल डिनवॉर का हुआ था, एक कुत्ते के काटने के बाद उनका चेहरा विकृत हो गया था.

इस घटना के बाद ट्रांसप्लांट सर्जरी के क्षेत्र में तकनीकी क्षमता और अनुभव में काफी वृद्धि हुई है.

डिनवॉर की नाक, होंठ और ठोड़ी को हटाकर दाता के ऊतकों, त्वचा, मांसपेशियों, धमनियों, नसों को उनके चेहरे पर लगाया गया. यह सर्जरी 15 घंटे तक चली थी.

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ऐसा ऑपरेशन पहली बार हुआ था लेकिन सर्जरी की ऐसी विधियां बहुत पहले से इस्तेमाल हो रही थीं.

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैकड़ों वायु सैनिक बुरी तरह जल गए थे और कुछ तो चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी के लिए ‘गिनी पिग क्लब’ के सदस्य हो गए.

चिकित्सकों ने कई प्रयोग किए और रोगी के शरीर के दूसरे हिस्से की त्वचा को चेहरे पर लगाया.

लेकिन दाता अंगों को इस्तेमाल करने की बात सर्जन तब तक नहीं सोच सके जबतक दशकों बाद ताक़तवर एंटी रिजेक्शन ड्रग्स नहीं आ गईं.

साल 2010 में एक स्पैनिश सर्जन ने दुनिया का पहला सम्पूर्ण फ़ेस ट्रांसप्लांट किया.

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Image caption ऑस्कर वो पहले इंसान थे, जिनका पूरा चेहरा प्रत्यारोपित किया गया.

इस सर्जरी में ऑस्कर नाम के व्यक्ति पर जबड़ा, नाक, गाल की हड्डियां, मांसपेशियां, दांत और भौंहें समेत पूरा चेहरा ही लगाया गया.

इसके दो साल बाद डॉ रॉडरिगेज एक क़दम और आगे बढ़े और बंदूक से हुई दुर्घटना में घायल अमरीका के वर्जीनिया के रिचर्ड नोरिस का फ़ेस ट्रांसप्लांट करने के लिए 36 घंटे लंबा ऑपरेशन किया.

नोरिस के चेहरे के बीच का हिस्सा लगभग ख़त्म हो गया था और उन्हें नई नाक, होंठ, दोनों जबड़े और जीभ के एक हिस्से की ज़रूरत थी.

इस प्रत्यारोपण में चेहरे के समूचे ऊतकों की ज़रूरत थी यहां तक कि त्वचा के नीचे की मांसपेशियों की भी, जो कि चेहरे के भाव पैदा करती हैं.

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Image caption रिचर्ड नोरिसः दुर्घटना से पहले, बाद में और प्रत्यारोपण के बाद.

इसके अलवा संवेदना ले जाने लाने वाली नसों को भी प्रत्यारोपित किया गया ताकि संवेदना पता चल सके और उसके अनुरूप मांशपेशियां काम कर सकें.

डॉ रॉडरिगेस ने उस समय कहा था, “हमारा लक्ष्य है चेहरे को फिर से पहले की तरह काम करने वाला बनाना और साथ ही सौंदर्यबोध के मुताबिक़ अच्छे नतीजे हासिल करना.”

और ऐसा करने में उन्होंने आखिरकार सफलता पाई. चेहरे की मांसपेशियों में नसों के प्रत्यारोपण के बाद नोरिस फिर से बोलने और त्वचा में संवेदनाओं को महसूस करने में कामयाब रहे.

इस सफलता से उत्साहित डॉ रॉडरिगेज ऐसे मरीज़ तलाशने लगे जिसकी वो मदद कर सकते थे और जब वो हार्डिसन से मिले तो उन्होंने अब तक की सबसे बड़ी फ़ेस ट्रांसप्लांट सर्जरी करने का फैसला किया.

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Image caption माइक्रोबायोलॉजी और प्लास्टिक सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ. रॉडरिगेज.

इस ऑपरेशन में अंगदाता के सिर की पूरी त्वचा, माथा, चेहरा, भौंहें और कानों के साथ त्वचा के नीचे की कुछ मांसपेशियों, नसों और खून ले जाने वाली नलिकाओं को लिया गया.

इस प्रक्रिया में सबसे अहम था, चेहरे की प्रमुख हड्डियों- नाक को जोड़ने वाली हड्डियों, ठोड़ी का सिरा, और गाल की कुछ हड्डियों को प्रत्यारोपित करना.

इसका मतलब ये कि चेहरे की बनावट के लिए बेहतर ढांचे की ज़रूरत होती ताकि उन्हें सही खांचे में लगाया जा सके.

ऊपरी और निचली भौहों को मरीज़ की आंखों पर चढ़ा दिया गया और नाक और मुंह की अंदरूनी त्वचा को भी सिल दिया गया.

इस तरह से हार्डिसन और अंगदाता डेविड रोडेनबॉग का 'हाब्रिड' तैयार हुआ.

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अंगदाता डेविड रोडेनबॉग एक साइकिल दुर्घटना में घायल हो गए थे.

सर्जरी के अंत तक सफलता के संकेत मिलने लगे थे.

हार्डिसन के नए चेहरे में होंठ और कान का रंग इस बात का संकेत दे रहा था कि इन अंगों में खून की आपूर्ति बहाल हो गई थी.

उनके सिर दाढ़ी के बालों में तुरंत वृद्धि होनी शुरू हो गई.

सर्जरी के तीसरे दिन, जब सूजन कम होना शुरू हो गई तो वो पलकें झपका सकते थे.

एक सप्ताह में ही वो व्हील चेयर पर बैठने लायक हो गए थे.

और अब इस सर्जरी के तीन महीने बाद वो अब अपनी ज़िंदगी जी रहे हैं.

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इस तरह के अन्य मरीज़ों की तरह ही हार्डिसन को पूरी ज़िंदगी एंटी रिजेक्शन दवा पर निर्भर रहना होगा ताकि उनके शरीर का प्रतिरोधी तंत्र उनके नए चेहरे को नुकसान न पहुंचाए.

जिस एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर में यह अभूतपूर्व सर्जरी हुई, वहां हार्डिसन को नियमित चेकअप के लिए जाना होगा.

कुछ महीने बाद, जब उनके चेहरे की सूजन पूरी तरह ख़त्म हो जाएगी तो सर्जन एक और ऑपरेशन की योजना बना रहे हैं ताकि हार्डिसन की आंखों और मुंह से अतिरिक्त त्वचा को हटाया जा सके.

रॉडरिगेस आगे एक ऐसे मरीज़ की तलाश में है, जिसे वो एक नया चेहरा दे सकें.

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