वो नाम जिनसे 'कंप्यूटरों की है दुश्मनी'

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कभी आपने सोचा है कि आपका नाम आपके लिए सिरदर्द बन सकता है. चलिए, आपको आज अपने नाम की वजह से परेशान लोगों के क़िस्से सुनाते हैं.

अमरीका की रहने वाली जेनिफ़र नल का मामला ले लीजिए. किसी भी कंप्यूटर सिस्टम पर अपना नाम डालती हैं और मुसीबत आ जाती है. जैसे ही वो एयरलाइन टिकट कटाने के लिए अपना नाम भरती हैं, सिस्टम कहता है कि अपना सरनेम डालिए.

जेनिफ़र के सरनेम 'Null' को कोई सिस्टम पढ़ ही नहीं पाता. कंप्यूटर की भाषा में 'Null' शब्द का मतलब है ख़ाली, शून्य. जेनिफ़र जब थक-हारकर एयरलाइन के कॉल सेंटर फ़ोन करती हैं तो वहां कोई उनकी बात पर यक़ीन ही नहीं करता.

जेनिफ़र की ये मुसीबत यहीं ख़त्म नहीं होती. वो किसी सरकारी वेबसाइट जैसे टैक्स भरने वाली, या फिर अपना पासपोर्ट अपडेट करने वाली साइट पर जाती हैं, तो वहां भी यही होता है. हाल ही में जब जेनिफ़र न्यूयॉर्क गईं, रहने के लिए तो अपने काग़ज़ात बनवाने में उनके पसीने छूट गए.

'Null' असल में जेनिफ़र के पति का सरनेम है. शादी से पहले ही उनके पति ने आगाह किया था कि ये मुसीबत आने वाली है. उस वक़्त वो पार्ट टाइम टीचर का काम करती थीं जिसमें उन्हें ऑनलाइन पता चलता था कि किसी घर जाकर पढ़ाना है.

मगर उन्हें कभी भी ऑनलाइन ये जानकारी मिलती ही नहीं थी. क्योंकि सिस्टम उनका नाम ही नहीं पढ़ पाता था. उन्हें हमेशा फ़ोन करके अपने लिए काम तलाशना पड़ता था.

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अब तो इन सिरदर्दों का सामना करने की आदत हो गई है. वो ख़ुद अपनी मुसीबतों के क़िस्से दोस्तों से साझा करके हंसती हैं. मगर, जब वो कंप्यूटर पर इस दिक़्क़त से जूझ रही होती हैं तो उन्हें बहुत ग़ुस्सा आता है.

जेनिफ़र जैसे बहुत से लोग हैं, जिनके नाम, आम नहीं हैं. ऐसे लोगों के नाम पढ़ने से कंप्यूटर सिस्टम इनकार कर देता है. आज जब हर चीज़ ऑनलाइन उपलब्ध है. हर काम कंप्यूटर के ज़रिए हो रहा है. तो, ऐसे में जेनिफ़र जैसे असामान्य नाम वाले लोगों के लिए कंप्यूटर के ये नख़रे, बड़े सिरदर्द का सबब बन जाते हैं.

दुनिया में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो इस परेशानी से जूझते हैं. किसी का सरनेम नहीं होता, तो किसी के सरनेम में सिर्फ़ एक अक्षर होता है. अमरीका के हवाई की रहने वाली जेनिस के सरनेम में 36 अक्षर थे.

किसी भी सरकारी या प्राइवेट वेबसाइट में उनका नाम ही नहीं आता था. उन्होंने सरकार से गुहार लगाई. तो बाद में अमरीकी सरकार ने लंबे सरनेम के लिए भी इंतज़ाम किया, अपनी तमाम वेबसाइट्स पर.

जानकार, ऐसे मामलों को कंप्यूटर की ज़ुबान में ''एज केस'' या बेहद ग़ैरमामूली मामले कहते हैं.

कंप्यूटर प्रोग्रामर पैट्रिक मैकेंजी कहते हैं कि ऐसे असामान्य मामलों के लिए कोई कंप्यूटर सिस्टम तैयार नहीं होता. उनकी प्रोग्रामिंग तो आम नामों के लिए होती है. हर साल सिस्टम को अपडेट करने के बाद भी कई लोग अपने नाम की वजह से इस मुसीबत से जूझते हैं.

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मैकेंजी ने ऐसे नामों की लिस्ट तैयार की है, जिन्हें कंप्यूटर सिस्टम पढ़ नहीं पाते और जिनका कोई तोड़ कंप्यूटर प्रोग्रामर निकाल नहीं पाए हैं अब तक.

ख़ुद मैकेंजी का ही मामला ले लीजिए. वो जापान में रहते हैं, जहां सरनेम तीन अक्षर से ज़्यादा के नहीं होते. मैकेंजी के सरनेम में आठ अक्षर हैं. तो कई ऐसे फॉर्म हैं जिनमें मैकेंजी के सरनेम के लिए जगह ही नहीं होती.

मैकेंजी ने इसका तोड़ इस तरह निकाला कि वो अपना नाम उल्टा करके लिखते हैं, मैकेंजी पी. इस तरह उनके सरनेम में एक ही अक्षर रह जाता है, जिसके लिए फॉर्म में जगह होती है.

इससे पहले उन्होंने अपना सरनेम जापानी रख लिया था. मगर जब सरकारी सिस्टम अपडेट हुए तो उस सरनेम को डेटाबेस से हटा दिया गया. कंप्यूटर उनका नाम पढ़ ही नहीं पाता था. कुछ दिनों तक तो वो अपने बैंक की वेबसाइट का ही इस्तेमाल नहीं कर पाए. अपना इनकम टैक्स नहीं भर पाए.

बाद में उन्होंने लिखित रूप से बैंक को अर्ज़ी दी. बैंक ने इनकम टैक्स डिपार्टमेट में अपना प्रोग्रामर भेजा, तब जाकर मैकेंजी अपना इनकम टैक्स रिटर्न भर सके.

वो बताते हैं कि दुनिया भर में वेबसाइट्स अब एक ही तरह ही हो रही हैं, जो अमरीका से लेकर जापान, चीन और भारत तक एक जैसी होती हैं. ऐसे में ग़ैरमामूली नामों की दिक़्क़त से निपटने के लिए प्रोग्रामर्स कोई फॉर्मूला ढूंढने में लगे हुए हैं.

अब जैसे अमरीका की कोई वेबसाइट, जापान के सरनेम के हिसाब से नहीं होगी, तो जापान के लोगों को उसके इस्तेमाल में दिक़्क़त होगी.

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इंटरनेट के पैमाने तय करने वाली संस्था वर्ल्डवाइड वेब कंसर्शियम ने इस मुद्दे पर बहस छेड़ रखी है. लोगों से अपनी राय रखने को कहा जा रहा है. ताकि इस मसले का हल खोजा जा सके. मैकेंजी बताते हैं कि धीरे-धीरे हालात बेहतर हो रहे हैं. किसी ख़ास लफ़्ज़, किसी ख़ास हर्फ़ को लेकर, कंप्यूटर सिस्टम में आने वाली दिक़्क़तें दूर की जा रही हैं.

हालांकि अमरीका की जेनिफ़र नल की मुसीबत का हल फिर भी नहीं मिला है. जानकार उन्हें अपना नाम बदलने की सलाह देते हैं. मगर वो साफ़ इनकार करती हैं. आख़िर शादी के बाद उन्होंने एक बार अपना नाम बदला था. वो बार-बार नाम बदलने को राज़ी नहीं.

अब वो ऐसी दिक़्क़त का सामना करने की आदी हो चुकी हैं.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.)

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