सूरज के माथे पर बुध की बिंदी, 9 ख़ास बातें

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सोमवार को आसमान में एक अनोखी खगोलीय घटना होने वाली है.

सूर्य और पृथ्वी के बीचोबीच बुध ग्रह आने वाला है. ये खगोलीय घटना करीब दस साल के बाद घट रही है.

मुंबई के नेहरु प्लेनेटेरियम के डायरेक्टर अरविंद परांजपे ने दी जानकारी.

1. यह खगोलीय घटना ऐसी है जिसमें सूर्य का सबसे करीबी ग्रह बुध, सूर्य और पृथ्वी के बिल्कुल बीच में आने वाला है. जिसके चलते आपको बुध सूर्य के ऊपरी भाग से गुजरता हुआ नज़र आएगा.

2. ऐसा सिर्फ बुध और शुक्र ग्रह के साथ ही हो सकता है क्योंकि दूसरे सभी ग्रह पृथ्वी से काफी दूर है इसलिए वो कभी भी पृथ्वी और सूर्य के बीच में नहीं आते हैं.

3. इस घटना को पारगमन कहा जाता है. बुध का पारगमन सौ साल के अवधि में तकरीबन 13 से 14 बार हो सकता है लेकिन यह कोई जरूरी नहीं है कि पृथ्वी के एक ही जगह से यह दिखाई दे. यह पृथ्वी के अलग-अलग भागों से दिखाई दे सकता है.

4. इसे बिना दूरबीन के नहीं देखा जा सकता है. जिसने ग्रहण के वक्त के गॉगल बचाकर रखे हैं और वो उनसे इसे देखने का प्रयास करेंगे तो नहीं देख पाएंगे. लेकिन दूरबीन से सीधे सूर्य की ओर ना देखें. इसे आंखों को नुकसान पहुंच सकता है. इससे आंखों की रेटीना जल जाएगी.

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5. इसे देखने का आसान तरीका यह है कि आप दूरबीन से उसकी छाया किसी सफेद कागज के ऊपर लीजिए फिर देखिए. इसतरह से आपके साथ-साथ कई लोग आसानी से इसे देख पाएंगे.

6. भारतीय समयानुसार यह भारत में शाम को चार बजकर 42 मिनट से दिखाई देना शुरू हो जाएगा. यह तकरीबन साढ़े सात घंटे तक रहेगा. लेकिन चूंकि भारत में तब तक सूर्यास्त हो गया रहेगा इसलिए भारत में इसका सिर्फ पहला भाग ही देखा जा सकेगा. इसका अंत अफ्रीका से दिख पाएगा.

7. इसमें सूर्य के ऊपर एक काला सा बिंदू धीरे-धीरे चलता हुआ नज़र आएगा. हर पांच मिनट में इसकी स्थिति बदलती नज़र आएगी.

8. जब सूर्य अस्त होने लगेगा तो पहले सफेद सा नज़र आएगा. इसके बाद थोड़ा सा पीला नज़ए आएगा फिर जब पूरा अस्त होने के कगार पर आएगा तो लाल रंग का नज़र आएगा.

9. किसी भी खगोलीय घटना का इंसान के जीवन पर कोई असर नहीं होता है. बस इसे देखने के वक्त एहतियात बरतना चाहिए.

(अरविंद परांजपे से बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय की बातचीत पर आधारित)

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