स्मार्टफ़ोन में समाती मेडिकल सेवाएं

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अब आप डॉक्टरों से सलाह ऑनलाइन ले सकते हैं, लैब टेस्ट ऑनलाइन बुक करके बाद में अपनी रिपोर्ट डॉक्टरों को ऑनलाइन दिखा सकते हैं.

फिर जो भी दवा डॉक्टर कहता है उनमें से कुछ ऑनलाइन ही ऑर्डर करके घर डिलीवर करवा सकते हैं. मोबाइल के ज़रिए पेमेंट करने की सुविधा अब देश भर में आसान हो गई है.

करीब आठ साल पहले प्रैक्टो ने इस ज़रूरत को समझा और डॉक्टरों को ये रास्ता दिखाया.

पिछले कुछ सालों से कई ऐसी कंपनियां आप तक डॉक्टरों को ऑनलाइन पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं.

जैसे-जैसे मोबाइल इंटरनेट कनेक्टिविटी सुधर रही है, वैसे-वैसे लोगों के लिए डॉक्टर से ऑनलाइन कनेक्ट करना भी आसान हो रहा है. और कंपनियां लोगों और डॉक्टरों को रास्ता दिखा रही हैं.

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प्रैक्टो अब इस काम में अकेला नहीं है. उसके जैसा ही लाइब्रेट, एक्टिव डॉक्टर्स ऑनलाइन, डॉक्टर स्प्रिंग, मेड वंडर्स, आई क्लिनिक केयर, आई क्लिनिक के अलावा कई और कंपनियों की भीड़ सी तैयार हो गई है.

इंटरनेट की मदद से ये कंपनियां डॉक्टरों और लोगों के बीच की कड़ी बनने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती हैं.

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इन सभी कंपनियों की कोशिश है कि आप उनके ऐप डाउनलोड करके अपने स्मार्टफोन पर रखें. उसके बाद जब भी डॉक्टर की सलाह लेनी हैं तो बस ऐप लॉन्च कीजिए और सर्च करते हुए सही डॉक्टर से सलाह की तैयारी कर लीजिए.

पिछले दो-तीन वर्षों में ये इतना बड़ा बाजार बन गया है कि अब बड़ी कंपनियों की भी नज़र इस पर पड़ रही है. मेदांता का ही नाम लीजिए.

गुडगाँव, हरियाणा में जो उनका अस्पताल है उसमे कई देशों से मरीज़ आते हैं. लेकिन अब वहां के डॉक्टर भी मरीजों से ऑनलाइन बात करने को तैयार किए जा रहे हैं. और मरीजों के लिए सभी जानकारी वो अपने वेबसाइट पर दे रहा है .

सभी ऐप आपसे डॉक्टर की सलाह के लिए अलग तरीके से पैसे लेते हैं. अगर आप सिर्फ फ़ोन पर कॉल करके सलाह लेंगे तो उसकी फीस अलग है, व्हाट्सऐप पर कनेक्ट करने के लिए कुछ कम पैसे लगते हैं और अगर आप वीडियो कॉल करके डॉक्टर से मशविरा करना चाहते हैं तो थोड़े ज़्यादा पैसे देने होंगे.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन लाइब्रेट के साथ हाथ मिलाकर स्वास्थ्य सेवा को डिजिटल रूप देने की कोशिश कर रहा है.

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लाइब्रेट का दावा है कि देश भर के 200 शहरों से करीब एक लाख डॉक्टर अब उसके साथ जुड़ गए हैं. कंपनी के सर्वे में पता चला कि महानगरों के बाहर महिलायें अपनी बीमारियों के बारे में डॉक्टरों से बात नहीं करती हैं और उनकी जगह पुरुष बात करते हैं. स्मार्टफोन के ज़रिए ऐसे व्यवहार को बदलना भी संभव है.

देश भर के डॉक्टरों के लिए ऐसी महिलाओं से भी बात करना बहुत आसान है. अगर आप ऐसे शहरों में से एक में रहते हैं तो शुरुआती इलाज के लिए कहीं जाने की ज़रूरत नहीं है.

बस घर पर बैठिए और स्मार्टफोन को अपने लिए मेहनत करने को आदेश दीजिए.

चूंकि स्वास्थ्य से जुडी कई कंपनियां ऑनलाइन होती जा रही हैं, कुछ कंपनियां डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड को स्टोर करने की भी सुविधा देने लगी हैं.

ज़िगी ने स्वास्थ्य के बाजार के लिए ऑनलाइन मार्केटप्लेस की घोषणा की है और वो आपके रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने में भी मदद करेगा. ये रिकॉर्ड कोई भी मरीज़ डॉक्टर के पास जाने पर उसे रिकॉर्ड देखने की इजाज़त दे सकता है.

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लेकिन सभी दवा को ऑनलाइन बेचने के लिए अभी इजाज़त नहीं है. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ़ इंडिया फिलहाल इसके लिए क़ानून बनाने की तैयारी कर रहा है.

अगर इसकी इजाज़त मिल गई तो हेल्थकार्ट प्लस , बाई ड्रग और मेडी डार्ट और उनके जैसी कई और कंपनियां आप तक दवा भी पहुंचाने के लिए तैयार हैं.

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