'प्राइवेट ब्राउज़िंग' के हैं कई फ़ायदे

इमेज कॉपीरइट Getty

बिना अपने कंप्यूटर पर कूकीज डाउनलोड किये या फिर अपने बारे में किसी भी वेबसाइट को कम जानकारी देकर भी आप ब्राउज़िंग कर सकते हैं. उसके लिए आपको 'प्राइवेट ब्राउज़िंग' या'इनकौगनीटो मोड' में करना होगा और उसको करना बहुत आसान है.

अगर आप किसी भी प्रोडक्ट या सर्विस के लिए वेब सर्च कर रहे हैं तो 'प्राइवेट ब्राउज़िंग' से सर्च सेव नहीं होता है.

कोई भी जब आपका कंप्यूटर इस्तेमाल करेगा तो उसे पता नहीं चलेगा कि आपने क्या सर्च किया है. वर्ना सभी सर्च जो आपके गूगल अकाउंट से किया जाता है उसका गूगल के पास रिकॉर्ड होता है.

गूगल क्रोम पर 'प्राइवेट ब्राउज़िंग' करने के लिए ब्राउज़र लांच करने के बाद दाहिनी तरफ़ ऊपर में ये तीन लाइन दिखाई देती हैं उनपर क्लिक कीजिये. वहां पर 'न्यू इनकौगनीटो विंडो' लिखा दिखाई देगा जिसपर आपको क्लिक करना होगा.

उसके बाद जो ब्राउज़र खुलेगा उसपर आप 'प्राइवेट ब्राउज़िंग' कर सकते हैं. ये 'प्राइवेट ब्राउज़िंग' तब तक चलेगा जब तक आप उसी विंडो पर किसी भी वेबसाइट पर जाएंगे.

अगर आप क्रोम ब्राउज़र इस्तेमाल करते हैं तो'प्राइवेट ब्राउज़िंग' के समय भी अपने ब्राउज़िंग की हिस्ट्री को सुरक्षित रखने के लिए एक एक्सटेंशन डाउनलोड कर सकते हैं.

'ऑफ द रिकॉर्ड हिस्ट्री'नाम के इस एक्सटेंशन को इस्तेमाल कर के आप जितनी देर 'प्राइवेट ब्राउज़िंग' करेंगे, आपकी हिस्ट्री बरकरार रहेगी. एक बार आप ब्राउज़र को बंद कर देंगे तो ये हिस्ट्री मिट जायेगी.

वैसे अपने रोज़ाना के ब्राउज़िंग के बारे में जानने के लिए ब्राउज़र की 'सेटिंग' में जाकर बीते दिनों आप जिस भी वेबसाइट पर थे उनके बारे में जानकारी मिल जायेगी. ये हिस्ट्री आप अपने कंप्यूटर से मिटा तो सकते हैं लेकिन आपके ब्रॉडबैंड सर्विस प्रोवाइडर के पास ये जानकारी हमेशा रहती है.

इमेज कॉपीरइट AFP

'प्राइवेट ब्राउज़िंग'करके आप कानूनी एजेंसियों से भी बच नहीं सकते हैं.

लेकिन इ कॉमर्स या फेसबुक, ट्विटर जैसे कंपनियों की कूकीज़ से बचने का ये बहुत बढ़िया तरीका है.'प्राइवेट ब्राउज़िंग' करने पर ऐसे वेबसाइट को आपके बारे में सीमित जानकारी मिल पाती है और वो आपको सिर्फ आपके पसंद के विज्ञापन नहीं दिखा पाएंगे.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

संबंधित समाचार