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 विज्ञान
गुरुवार, 09 जनवरी, 2003 को 19:30 GMT तक के समाचार
क्या है क्लोनिंग का सच?
एक कठिन और जटिल प्रक्रिया है क्लोनिंग की
एक कठिन और जटिल प्रक्रिया है क्लोनिंग की

विनीता द्विवेदी

2003 की शुरूआत में विज्ञान जगत की सबसे बड़ी ख़बर रही मानव क्लोनिंग की.

वैसे देखा जाए तो इस साल की वैज्ञानिक भविष्यवाणी में भी कहा गया था कि क्लोनिग के क्षेत्र में कुछ अनोखे की उम्मीद की जा सकती है.

तो साल शुरू हुआ और क्लोनेड नाम की एक कंपनी ने घोषणा कर दी कि 26 दिसंबर को दुनिया का पहला क्लोन किया हुआ मानव शिशु पैदा हो गया है.

क्लोनेड की निदेशक ब्रिजेट बोइसिलियर ने कहा ईव नाम की क्लोन की हुई बच्ची विज्ञान जगत का करिश्मा है.

उन्होंने कहा कि “जब सब लोग यह कह रहे थे कि यह सही नहीं है, किसी भी तरह से मानव क्लोनिंग नहीं की जानी चाहिए, तो हमें यह स्वीकार नहीं था. हम रेलियन हैं और विज्ञान पर रोक लगाना हमारे लिए संभव नहीं है”.

“विज्ञान मानवता के लिए सबसे बुरा या अच्छा हो सकता है और मैं यह मानती हूँ कि यह अच्छे के लिए है.”


“विज्ञान मानवता के लिए सबसे बुरा या अच्छा हो सकता है और मैं यह मानती हूँ कि यह अच्छे के लिए है

ब्रिजेट बोईसिलियर
एक धार्मिक गुट रेलियन से संबध रखने वाली क्लोनेड ने यह भी कहा कि दरअसल मानव जाति भी विज्ञान से ही जन्मी है.

यानी उनका मानना है कि दूसरी दुनिया के लोगों ने जेनेटेक विज्ञान के सहारे मानव जाति को पैदा किया था, वे क्लोनिंग को अंनत जीवन का रास्ता बता रहे हैं और बहुत से लोग यह मान रहे हैं कि क्लोनिंग क्लोनेड के अंनत व्यापारिक फ़ायदे का रास्ता है.

क्लोनेड का अनुमान है वो कि प्रति क्लोन वो दो लाख डॉलर की फ़ीस ले सकता है.

सबूत

लेकिन क्लोनेड के इस दावे का रोड़ा यह है कि वो इस दावे को अभी तक साबित नहीं कर पाए हैं.


ब्रिजेट बोइसिलियर अपने दावा का सबूत नहीं दे पाई हैं
तो क्या करना होगा उन्हें. दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के जेनेटिक मेडेसिन विभाग के प्रमुख डॉ आई सी वर्मा का कहना है उन्हें किसी तटस्थ वैज्ञानिक या टीम के समक्ष क्लोन किए गए बच्चे और उसकी माता (या पिता) का खून लेना होगा.

उसमें मौजूद डीएनए को जाँचा जाएगा जो, इस केस में, दोनों ही में एक जैसा होना चाहिए.

क्लोनेड अपने दावा का सबूत दे पाती है या नहीं यह तो देखने वाली बात है लेकिन सैंद्धातिक तौर पर यह सच है कि मानव क्लोनिंग की जा सकती है.

हांलाकि यह एक बहुत ख़र्चीली, जोख़िम भरी और जटिल प्रक्रिया है. इसके कई नुकसान हैं.

कई बार इस क्लोन का आकार बहुत बड़ा हो जाता है और गर्भाशय के फटने तक का ख़तरा होता है.

क्लोन का गर्भ प्रायः अपने आप ही ख़त्म हो जाता है.

पहले स्तनपायी जानवर के क्लोन यानि भेड़ डॉली के लिए 247 गर्भधारण हुए थे, और एक ही कामयाब हुआ.


डॉली में भी कई कमियां हैं
स्कॉटलैंड के रोसलिन इंस्टीट्यूट के ईयन विलमट डॉली को बनाने वाली टीम के प्रमुख थे जो कि मानव क्लोनिंग के इन दावों पर सबसे ज़्यादा अविश्वास व्यक्त करते हैं.

डॉ विलमट का कहना है कि “लोगों ने सुअर के क्लोन बनाने का दावा किया है, किसी ने उन्हें देखा नहीं, न ही वो सुविधाएं जहा यह संभव हो सका. फिर बंदरों के क्लोन के दावे हुए, उन्हें किसी ने नहीं देखा”.

तो यह कहा जा सकता है कि जब भी क्लोंनिग के केस में सफलता मिली है तो विशेषज्ञों को आश्चर्य हुआ है.

ऐसे में क्लोनेड का यह दावा कि उन्होंने पाँच मानव क्लोनों में सफलता प्राप्त की है पर संदेह होना लाज़िमी है, ऊपर से रोड़ा यह कि वे सबूत भी नहीं दे पा रहे हैं.

सच हुआ तो?

लेकिन यदि यह सच हुआ तो?

हैदराबाद में भारत के सेंटर फ़ॉर सेल्यूलर एंड मोलिक्यूलर बायोलोजी के निदेशक डॉ लालजी सिंह कहते हैं कि क्लोनिंग का दुष्परिणाम यह हो सकता है कि लोग एक ही व्यक्ति के कई क्लोन बना सकते हैं जिनका उपयोग ग़लत कामों के लिए किया जा सकता है.

ख़ैर भारत में क्लोनिंग प्रतिबंधित है लेकिन डॉ लालजी सिंह चाहते हैं कि सरकार उस स्तर तक की क्लोनिंग की इजाज़त दे दे जिसका उपयोग इलाज के लिए किया जा सकता है


मैं भारत सरकार से मांग कर रहा हूँ कि एक स्तर तक की क्लोनिंग की इजाज़ दे दी जाए.

डॉ लालजी सिंह

इस सब बहस से मुख्याधारा के वैज्ञानिक काफ़ी परेशान हैं.

क्लोनेड और उसके जैसे संगठन या वैज्ञानिक क्लोन बनाने का दावा तो करते हैं लेकिन विज्ञान की मान्यता प्राप्त मैगज़ीन या जर्नल में कुछ नहीं लिखते हैं और अपने काम के जांच भी नहीं होने देते हैं.

पर मानव का क्लोन बनाना ऐसा दावा तो है जिससे न सिर्फ़ मानवता का इतिहास पर सवाल उठता है बल्कि मनुष्य होने के अर्थ, और सृष्टिकर्ता ईश्वर पर भी.

अब आगे आने वाला समय ही बताएगा कि विज्ञान अपनी इस पहल मे कहां तक पहुँचा है और क्या सही है क्या ग़लत.
 
 
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