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मंगलवार, 04 फरवरी, 2003 को 06:37 GMT तक के समाचार
यह पानी है या ज़हर?
कई बोतलों में तो पानी के नाम पर ज़हर ही भरा होता है
कई बोतलों में तो पानी के नाम पर ज़हर ही भरा होता है

दिल्ली से मलय नीरव

भारत में एक आम बात हो गई है कि हर आदमी नल के पानी को छोड़कर बोतल का पानी पीना चाहता है क्योंकि दावा किया जाता है कि वह 'मिनरल वॉटर' होता है और 'शुद्ध' भी होता है.

  पूरी रिपोर्ट सुनिए

बात कुछ ठीक भी लगती है क्योंकि पानी की बोतल ख़रीदने वाले हर व्यक्ति के मन में कहीं ये विश्वास ज़रूर होता है कि वह ऐसा पानी पी रहा है जो उसकी सेहत के लिए बहुत लाभदायक है.

या यूँ भी कहें कि पानी की बोतलें बनाने वाली कंपनियों ने एक सुनियोजित प्रचार के ज़रिए लोगों के दिलों में ये बात बिठा दी है कि पैसे से ख़रीदकर पिया गया पानी ही सेहत के लिए ठीक है और आम नल का पानी सेहत के लिए बहुत ख़तरनाक़ है.

लेकिन क्या हो जब आपको ये पता चले कि जो पानी की बोतल आप दूध के भाव ख़रीदते हैं उस बोतल में शुद्ध जल के बजाय ऐसा पानी होता है जो सेहत के लिए किसी ज़हर से कम नहीं.

आपका भरोसा हिल सकता है और यह स्वभाविक भी है क्योंकि उसकी ठोस वजह है.


मिनरल वॉटर और शुद्ध पेय जल के नाम पर बेची जाने वाली बोतलों में कीटनाशक पाए गए हैं. और सब जानते हैं कि कीटनाशक सेहत के लिए ज़हर के बराबर हैं

डॉ सुनीता नारायण
वजह ये है कि आमतौर पर हर दुकान, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों बिकने वाली पानी की बोतलों की जाँच में पाया गया है कि उनमें ख़तरनाक़ हद तक कीटनाशक रसायन तक मिले होती हैं.

भारत के विज्ञान और पर्यावरण केंद्र यानि सीएसई ने अनेक ब्राँडों वाली पानी की बोतलों की जाँच की.

केंद्र की निदेशक सुनीता नारायण बताती हैं कि सहयोगियों में ही यह विचार सामने आया कि बाज़ार में बिकने वाली खाने की चीज़ों और पानी की बोतलों की क्यों न जाँच की जाए कि इनका स्तर क्या होता है.

इसके बाद दिल्ली और मुंबई के बाज़ार में बिक रहे बोतलबंद पानी के कई नमूने जमा किए गए.

कीटनाशक

ये नमूने न केवल बाज़ार से बल्कि उन फ़ैक्टरियों से भी लिए गए जहाँ पानी की बोतलें भरी जाती हैं.

पानी की इन बोतलों की जाँच प्रयोगशाला में अमरीकी तकनीक और अत्याधुनिक पद्धति और उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए की गई.

विज्ञान और पर्यावरण केंद्र के एक अन्य वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर एच बी माथुर बताते हैं कि नमूनों की कई बार और प्रामाणिक तरीक़े से जाँच की गई.

निदेशक सुनीता नारायण कहती हैं, "जाँच के बाद जो जानकारी सामने आई वो बहुत अच्छी नहीं है."


अधिकतर बोतलों में ख़तरनाक़ हद तक कीटनाशक मिले
"मिनरल वॉटर और शुद्ध पेय जल के नाम पर बेची जाने वाली बोतलों में कीटनाशक पाए गए हैं. और सब जानते हैं कि कीटनाशक सेहत के लिए ज़हर के बराबर हैं."

डॉक्टर सुनीता बताती हैं कि चौंकाने वाली बात ये है कि कीटनाशक सभी बोतलों में मिला सिवाय एक कंपनी की बोतल के.

"और हर बोतल में कीटनाशकों की मात्रा सामान्य से काफ़ी ऊपर मिली."

सपना जॉन्सन बताती हैं कि 34 नमूनों की जाँच में लगभग सभी बोतलों में मुख्य रूप से लिंडेन और क्लोर पायरीफ़ोस नामक कीटनाशक पाए गए.

डॉक्टर सपना के अनुसार "क्लोर पायरीफ़ोस नामक कीटनाशक से कैंसर बहुत व्यापक पैमाने पर होता देखा गया है."

"यह बहुत चिंता की बात है कि पानी की बोतलों में कैंसर की बीमारी पैदा करने वाले रसायन मिले."

ये वैज्ञानिक बताते हैं कि मुम्बई के नमूनों के हालात कुछ बेहतर थे लेकिन दिल्ली के नमूनों में तो कीटनाशक रसायनों की मात्रा सामान्य से सौ प्रतिशत तक ज़्यादा पाई गई.

सलाह

डॉक्टर सुनीता नारायण बताती हैं कि बोतलों में पानी बेचने वाली ज़्यादातर कंपनियाँ भूमि तल से या तालाब से लिया गया पानी ही भरती हैं.

"ये जल स्रोत ऐसी जगह हैं जहाँ खेतों में इस्तेमाल के लिए कीटनाशक इस्तेमाल किए जाते हैं जिनका असर पानी में भी रहता है."

डॉक्टर सुनीता कहती हैं कि चिंता की बात ये है कि ग़रीब आदमी भी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा ख़र्च करके ये पानी ख़रीदता है और उसे मिलता क्या है - कैंसर का ख़तरा.

"यहाँ सवाल ये भी उठता है कि सरकार इस बारे में क्या कर रही है?"

डॉक्टर सुनीता कहती हैं "जब तक आम आदमी की सेहत के बारे में बनाए गए नियम क़ानून और मानक लागू नहीं किए जाते, तब तक कुछ नहीं हो सकता."

"मुद्दा ये भी है कि पानी की बोतलें बनाने वाली कंपनियों के स्थान पर आम आदमी की सेहत का ज़्यादा ध्यान रखा जाना चाहिए."
 
 
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