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बुधवार, 06 अगस्त, 2003 को 07:53 GMT तक के समाचार
अब शाकाहारी इंसुलिन
डायबिटीज़ के मरीज़ों में बहुत से इंसुलिन पर ही निर्भर हैं
डायबिटीज़ के मरीज़ों में बहुत से इंसुलिन पर ही निर्भर हैं

एक भारतीय दवा कंपनी ने मधुमेह यानी डायबिटीज़ के मरीज़ों के लिए एक इंसुलिन बनाई है जिसके बारे में वह दावा कर रही है कि यह एशिया की पहली शाकाहारी इंसुलिन है.

कंपनी का दावा है कि यह इंसुलिन ख़मीर यानी यीस्ट से बनाई जाती है.

आमतौर पर इंसुलिन सुअर और गाय को मारकर उनकी चरबी से बनाई जाती है.


भारत में डायबिटीज़ पीड़ितों की संख्या बढ़ रही है
इंसुलिन वह दवा है जो इंजेक्शन के रुप में डायबिटीज़ के मरीज़ों को लेनी होती है जिससे कि उनके खून में शर्करा की मात्रा स्थिर बनी रहे.

भारत में इस समय कोई दो करोड़ लोग डायबिटीज़ से पीड़ित हैं जिनमें से बहुत से लोग इंसुलिन पर ही निर्भर करते हैं.

इस इंसुलिन के आने से क़ीमतों में कोई 40 फीसदी तक की कमी आएगी.

यह शाकाहारी इंसुलिन भारतीयों के लिए एक इच्छी ख़बर की तरह हो सकती है क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में लोग शाकाहारी हैं और ज़्यादातर लोग गाय और सुअर का माँस नहीं खाते.

विकल्प

अब तक इंसुलिन लेने वाले डायबिटीज़ के मरीज़ों के पास कोई अच्छा विकल्प उपलब्ध नहीं था.

बाजार में उपलब्ध 90 फ़ीसदी इंसुलिन का निर्माण इन्ही जानवरों को मारकर होता है.


अब तक सुअर और गाय को मारकर ही बनता रहा है इंसुलिन
हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समुदाय के लोगों को ये इंसुलिन मजबूरी में लेनी पड़ रही थी.

धार्मिक आस्था के अनुसार हिंदू गाय का मांस नहीं खाते और मुस्लिम सुअर का.

भारतीय दवा कंपनी वोकहार्ड का दावा है कि उनका इंसुलिन पूरी तरह शाकाहारी है.

कंपनी का कहना है कि यह इंसुलिन दस वर्षों के शोध के बाद विकसित किया गया है.

वोकहार्ड के चेयरमैन हाबिल खोराकीवाला का कहना है, ''इस इंसुलिन का निर्माण ना सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि भारत के लिए भी एक तकनीकी उपलब्धि है.''

क़ीमत

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि लोग इंसुलिन इसलिए लेते हैं क्योंकि यह उनका जीवन बचाने के लिए आवश्यक होता है, ऐसे में शाकाहारी इंसुलिन का स्वागत ही होगा.


इस इंसुलिन का निर्माण ना सिर्फ कंपनी के लिए बल्कि भारत के लिए भी एक तकनीकी उपलब्धि है

हाबिल खोराकीवाला
लेकिन उनका मानना है कि मरीज़ों को नए इंसुलिन की ओर ले जाना आसान नहीं होगा क्योंकि अचानक इंसुलिन बदल लेने से कुछ समस्याएँ भी आ सकती हैं.

इस समय एशिया के बाहर की तीन दवा कंपनियाँ इंसुलिन बनाती हैं.

भारत में बिकने वाली ज़्यादातर इंसुलिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा बनाई जाती हैं पर ज़्यादातर को भारत में लाकर ही पैक किया जाता है ताकि क़ीमत घटाई जा सके.

वोकहार्ड के शाकाहारी इंसुलिन की क़ीमत एक सौ तीस रूपए के आसपास होगी जबकि इस समय इंसुलिन दो सौ से चार सौ रुपए के बीच मिलता है.

लेकिन लोगों का कहना है कि एक बार लोगों को इस इंसुलिन की आदत हो जाएगी तो फिर यह कंपनी भी अपने इंसुलिन की क़ीमत बढ़ा देगी.

इस समय भारत में डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों की संख्या सबसे अधिक दो करोड़ है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का आकलन है कि वर्ष 2025 तक डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों की संख्या बढ़कर पाँच करोड़ सत्तर लाख तक हो जाएगी.
 
 
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