'भारत की कठपुतली हैं बलोच नेता'

पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर आज़ाद बलूचिस्तान की मांग कर रहे निर्वासित बलोच नेता ब्रह्मदाग़ बुगटी और नाएला क़ादरी के बीच मतभेदों को ले कर चर्चा हो रही है.

ट्विटर पर हैशटैग #BBugtiAndNailaFight4Fame (यानि ब्रह्मदाग़ बुग्टी और नाएला क़ादरी के बीच मशहूर होने के लिए झगड़ा है) ट्रेंड कर रहा है.

नाएला क़ादरी ने इससे पहले घोषणा की थी कि वे बलूचिस्तान की निर्वासित सरकार बनाने के लिए भारत सरकार के समर्थन के लिए गुज़ारिश करेंगी.

उनकी इस घोषणा के बाद 12 अक्तूबर को बलोच रिपब्लिकन पार्टी के ब्रह्मदाग़ बुगटी ने कहा कि वे पाकितान के पश्चिमी इलाके बलूचिस्तान के सभी लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं.

स्वतंत्र बलूचितान की मांग कर रहे नेताओं में मतभेदों की बात तब ख़ुल कर सामने आ गई जब बुगटी ने कहा कि इस तरह का क़दम लेने से पहले राष्ट्रीय स्तर पर लोगों की सहमति लेनी चाहिए और नाएला क़ादरी बलोच उनके उद्देश्य को 'ऩुकसान' पहुंचा रही हैं.

बुगटी नवाब अक़बर बुगटी के पोते हैं जिनकी हत्या बलूचिस्तान में हो गई थी. उन्होंने पिछले माह जेनिवा में भारतीय दूतावास में भारत से राजनीतिक शरण मांगी थी. नाएला कनाडा में रहती हैं स्वयं को निर्वासित मानती हैं.

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इस साल 15 अगस्त के दिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में बलूचिस्तान में और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में पाकिस्तान के 'अत्याचार' का ज़िक्र किया था. इसके बाद बलूचिस्तान की 'आज़ादी' के मुद्दे पर एक बार फिर चर्चा छिड़ गई थी.

पाकिस्तान ने भारत पर इस मुद्दे को हवा देने का आरोप लगाया और इस पर गहरी नाराज़गी जताई थी.

पाकिस्तान में ट्विटर यूज़र दोनों बलोच नेताओं पर बलूचिस्तान की आज़ादी के लिए भारत की मदद लेने की कोशिश की आलोचना कर रहे हैं और उन्हें 'ग़द्दार' और 'कठपुतली' कह रहे हैं.

शेख़ हारून ने ट्वीट किया, "भारत उन्हें टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल करेगा और स्वार्थसिद्धि होने के बाद फेंक देगा. धोख़ेबाज़"

कई ट्विटर यूज़र्स ने बलोच नेताओं पर भारत के हाथों की कठपुतली बनने का आरोप लगाया.

अलीज़ुल ने ट्वीट किया, "दोनों भारत की कठपुतलियां हैं और भारत उनका इस्तेमाल करेगा और टॉयलेट पेपर की तरह फेंक देगा "

आतिफ़ मतीन ने लिखा, "बलूचिस्तान में अशांति पैदा करने के लिए बुगटी और नाएला क़ादरी भारत के इशारे पर काम कर रहे हैं."

फिज़ाली ने लिखा, "ये भारत के पेड एजेंट हैं और बलूचिस्तान के मुद्दे के लिए नहीं लड़ रहे. वे सिर्फ़ अपना नाम पाने के लिए लड़ रहे हैं."

राफ़िया बलोच ने ट्वीट किया, "भारत को इन पर एक फ़िल्म बनानी चाहिए जिसमें दोनों ग़द्दारों के नाम हों."

परवाईज़ ने लिखा, "दोनों खिलौने हैं और रॉ के हाथों में उनका रिमोट है."

अय्यात ने लिखा, "दोनों ग़द्दार भारत के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं, वो बलूचिस्तान के लिए कुछ नहीं करेंगे"

जावेद अली ने ट्वीट किया, "दोनों एक दूसरे का समर्थन नहीं कर रहे क्योंकि दोनों को पैसा और नाम चाहिए."

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