'रवीश ने सरकार की तंगदिली को बेनक़ाब किया'

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Image caption रवीश कुमार ने शुक्रवार का प्राइम टाइम शो मूक अभिनय कलाकारों के साथ किया.

सरकार की ओर से एक दिन के प्रसारण प्रतिबंध का सामना कर रहे समाचार चैनल एनडीटीवी का शुक्रवार रात प्रसारित प्राइम टाइम शो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं.

एंकर रवीश कुमार ने अपने शो में दो मूक अभिनय कलाकारों के सहारे सवाल किया कि अगर हम सवाल नहीं पूछेंगे तो क्या करेंगे.

प्राइम टाइम के प्रसारण के बाद से ही रवीश कुमार ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं और फ़ेसबुक पर भी उन्हें लेकर स्टेट्स लिखे जा रहे हैं.

अधिकतर लोगों ने जहां रवीश कुमार का समर्थन किया है वहीं कुछ लोगों ने ये भी लिखा है कि वो 'रोना रो' रहे हैं.

दिल्ली में आम आदमी पार्टी के मंत्री कपिल मिश्र ने ट्वीट किया, "पत्रकारिता ज़िंदा है और कोई इसे ख़त्म करने वाला अभी पैदा नहीं हुआ. तानाशाही के सपने देखने वालों को आज नींद नहीं आएगी."

आम आदमी पार्टी की ही प्रीति शर्मा मेनन ने लिखा, "मैं रवीश कुमार को प्रणाम करती हूँ. बचा लो दिल्ली को, हवा ही नहीं और भी बहुत कुछ है जो ख़राब है."

शिरीष कुंदेर ने ट्वीट किया, "मोदी को अपने स्लोगन अच्छे दिन को बचे-खुचे दिन में बदल देना चाहिए."

रोहिनी सिंह लिखती हैं, "ख़ामोशी शोर से ज़्यादा बोलती है."

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Image caption सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने पठानकोट हमलों की कवरेज के लिए एनडीटीवी पर एक दिन का प्रतिबंध लगाया है.

कुमारी रत्ना ने ट्वीट किया, "मूक अभिनय के ज़रिए प्राइम टाइम में आपने अपनी बात रखी. आप भारतीय पत्रकारिता का सर्वश्रेष्ठ रूप हो."

आयुष शर्मा ने ट्वीट किया, "रवीश कुमार ने अहसास कराया कि हमें उन जैसे पत्रकारों की ज़रूरत क्यों हैं. उन्हें सलाम. हम सब प्रतिबंध के ख़िलाफ़ हैं."

देविका ने ट्वीट किया, "इस ख़ामोशी के ड्रामे के बजाए एनडीटीवी सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा है. क्योंकि रवीश कुमार जानते हैं कि एनडीटीवी ने नियमों का उल्लंघन किया है."

प्रेरणा लिखती है, "रवीश कुमार रीढ़ वाले पत्रकार हैं."

अंबरीश कुमार ने फ़ेसबुक पर लिखा, "ये सरकार नहीं तय कर सकती कि मीडिया क्या लिखे या क्या दिखाए."

तृप्ति शुक्ला ने फ़ेसबुक पर लिखा, "उनके लिए सेना, सरकार और अदालत सब जवाबदेह हैं, लेकिन ख़ुद उनकी जवाबदेही तय करने लगो तो "आपातकाल" छा जाता है."

चंद्रभूषण ने फ़ेसबुक पर लिखा, "इमरजेंसी से कहीं ज्यादा ख़तरनाक स्थितियां दुनिया में बनती आई हैं. भारत में ये अब बनती नजर आ रही हैं तो हमें इसके नैतिक प्रतिवाद तक सीमित रहने के बजाय इससे आगे की चुनौतियों बारे में सोचना चाहिए."

ओम थानवी ने फ़ेसबुक पर लिखा, "आज रवीश का प्राइम टाइम ऐतिहासिक था. उन्होंने सरकार की तंगदिली को बेनक़ाब किया."