'पैसा नहीं है पर लाइन में रहने का दिल करता है'

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8 दिसंबर को नोटबंदी की घोषणा को पूरा एक महीना हो गया. इस बीच बैंकों और एटीएम के आगे से कतारों के लंबे बने रहने, और लोगों की परेशानियों की ख़बरें जारी हैं.

गुरुवार यानी 8 दिसंबर को बीबीसी ने अपने पाठकों से नोटबंदी की घोषणा के बाद उनके अनुभवों के बारे में पूछा.

इस सवाल पर हमें क़रीब 1,200 टिप्पणियां मिलीं:

नवदीप सिंह नामधारी ने लिखा, "मेरे घर में 2 मरीज़ हैं - एक कैंसर और दूसरा किडनी का. उन्हें ले कर मैं रोज अस्पताल जाता हूं. ट्रीटमेंट तो कार्ड पेमेंट से हो जाता है लेकिन सुबह 7 बजे से कभी-कभी शाम 5 बजे तक अस्पताल की कैंटीन में कुछ नहीं खा पाते, क्योंकि कैंटीन में कैश पेमेंट होता है."

आरिफ़ परवेज़ "छोटे व्यापारी हूं और एक ट्रेवेल और मनी ट्रांसफर एजेंसी चलाते हैं. मेरे ज़्यादातर ग्राहक ग़रीब तबके से हैं. नोटबंदी के फ़ैसले से मेरे बिज़नेस में 70 फीसदी तक की गिरावट आ गयी है. रोज़ का 1500-2000 तक का नुक़सान हो रहा है."

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नवीन रातू ने लिखा, "मुझसे किसी ने अपने भाई के इलाज के लिए 10,000 रूपये मांगे. मैं कुछ भी नहीं कर पाया."

अशोक नाएक ने लिखा, "हमारे यहां फल और सब्ज़ियां तैयार हो गई थी, पर मंडी में किसी के भी पास पैसे नहीं थे तो मंडी बंद कर दी. फल और सब्जियां सड़ रही है."

कुसुम सिंह ने लिखा, "मेरे अनुभव से किसान थोड़े दिनों मेँ आत्महत्या करने को विवश होगा. मोदी जी ने चुनावों में कहा था कि किसान को फ़सल के लागत मूल्य के दुगनी कीमत मिलनी चाहिए. पर यहां तो किसान को ख़त्म करने की योजना बना डाली. इस समय गन्ना छिलाई मे मज़दूरों को पैसा कहां से लाकर दिया जाए. मज़दूर सुबह काम करता है शाम को मज़दूरी मांगता है. बहुत ही संकट हो गया किसानों के लिए."

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मंगलेश तिवारी ने लिखा, "किसान ग़रीब मज़दूर अपने ही पैसों के लिए लंबी लंबी कतारों में लगने को मजबूर... ऊपर से अच्छे दिन बताकर कुछ नेता लोग जले पर नमक छिड़क रहे हैं."

जावेद ख़ान ने लिखा, "मेरे पास ख़ाने के लिए भी पैसे नहीं हैं. एटीएम बंद है. अगर कोई भक्त है तो यहां आ कर मेरी मदद करे. उधार ले कर जीना पड़ रहा है."

ख़ालिद अहमद ने लिखा, "मैंने घर का किराया नहीं दिया है. उन लोगों ने कैश में पैसा मांगा. मैं उन्हें कैसे कैश में पैसा दूं, जब अपनी ख़ुद की ज़रूरत के लिए मैं आधी रात से दो घंटे लाइन में लग रहा हूं."

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संदीप सिंह सैनी ने लिखा, "मोदी जी को वोट डाल के हमने ग़लती कर दी. मोदी जी, आपने हमारे साथ धोखा किया है और हमें अपने पैसे निकालने के लिए लाइन में लगना पड़ रहा है. एक दिन लाइन में लग कर टोकन लेते हैं और दूसरे दिन 4000 रूपये मिले हैं. बहुत अच्छे दिन आए हैं."

ए मल्लिक ने लिखा, "लोगों का कहना बहुत अच्छा लग रहा है. पिकनिक सा फील हो रहा है. बहुत लोगों से बात करने का मौक़ा मिल रहा है. पैसा नहीं है तब भी लाइन में लगे रहने का दिल करता है."

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