सोशल- '31 दिसंबर को मोदी शायद 100 का नोट बंद कर दें'

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भारत में सोशल मीडिया पर नोटबंदी छाई हुई है और चर्चा का विषय है प्रधानमंत्री मोदी का वो भाषण जो वो 31 दिसंबर को होने वाला है. कयास लगाए जा रहे हैं कि 2016 के आख़िरी दिन प्रधानमंत्री कुछ नई और अहम घोषणाएं कर सकते हैं.

बीबीसी हिंदी ने गुरुवार को अपने पाठकों से सवाल किया था कि इस भाषण में कौन सी घोषणाएं की जा सकती हैं?

हमें 700 से अधिक जवाब मिले. इनमें से कुछ दिलचस्प प्रतिक्रियाएं आप भी पढ़ें-

पीएम मोदी क्या कहेंगे 31 दिसंबर को?

अंशु निगम ने लिखा, ''मोदी सिर्फ़ सांत्वना देंगे. जनता का आभार प्रकट करेंगे. योजना को पूरा कर अंजाम तक पहुंचाने का कोई भी खाका और नीयत मोदी में नहीं. मोदी इस योजना में बदनीयती की वजह से ख़ुद उलझ चुके हैं और किसी तरह बच निकलना चाहते हैं. मगर अब ये मुश्किल है. यह योजना मोदी के लिए आत्मघाती बम बन चुकी है.''

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इंद्रजीत चड्ढा ने लिखा, ''नोटबंदी असफल रही, लेकिन इसे स्वीकार करना आत्महत्या के समान होगा. वो इस मामले को ढंकने की कोशिश करेंगे, कुछ रियायतें दे सकते हैं.''

जीतेंद्र सिंह ने लिखा, ''1 जनवरी 2017 की सुबह अख़बारों की सुर्ख़ियाँ कुछ इस तरह होंगी. विशेष चुनावों में वोटों की ख़रीद-फ़रोख़्त और धनबल समाप्त.''

मोहम्मद सलीम ने लिखा, ''31 को मोदीजी पहले तो माफी मांगेंगे. फिर बैंकों की कतार में जिन लोगों की मौत हुई उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे और उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखने के लिए कहेंगे.''

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ओम प्रकाश शर्मा ने लिखा, ''मुझे लगता है कि मोदी जी स्वाभिमानी होने के कारण अपनी अंतरात्मा की आवाज़ पर इस्तीफ़ा दे देंगे और विपक्षियों की बोलती बंद कर देगें.''

सुमित रिन्वा ने लिखा, ''देश के किसानों को बहुत उम्मीद है कि मोदी जी देश के सारे किसानों को कर्जमाफी के रूप में नये साल का तोहफ़ा देंगे.''

अहमद समानी ने लिखा, ''प्रधानमंत्री 50 दिन की विफलता के बाद राष्ट्र के नाम शोक-संदेश देंगे. बड़े दुस्साहसी हैं, शायद अगले 'कड़े' क़दम भी तजवीज़ करें.''

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जरजीस ख़ान ने लिखा, ''शायद 100 रुपये का नोट बंद कर दें. बहुत पुराना हो गया है ये नोट.''

आशुतोष पांडे ने लिखा, ''बेनामी और गहनों पर होगा अटैक.''

पीयूष यादव, ''कहना क्या है...? थोड़ा सा रो देंगे बस.'' रिय़ाज़ अहमद लिखते हैं, ''कहें कुछ भी लेकिन रोएंगे ज़रूर.''

समाधान आरएच फोरम ने लिखा, ''चाहे जो भी कहे देश हित में होगा.''

मोहम्मद अफ़रोज़ नेमत ने लिखा, ''कुछ भी कहें, क्या फर्क पड़ता है.''

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