'मैंने छेड़खानी की शिकायत वापस क्यों ली?'

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उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में क़ानून की छात्रा साम्या गुप्ता बस में अपनी सीट पर नींद ले रहीं थीं. अचानक उन्हें अपने सीने पर कुछ महसूस हुआ. ये उनकी पिछली सीट पर बैठे एक व्यक्ति का हाथ था.

21 वर्षीय साम्या गुप्ता ने इस घटना के बारे में फ़ेसबुक पर लिखा, "जैसे ही मुझे अहसास हुआ कि क्या हो रहा है, मैं अपनी सीट से उठ खड़ी हुई, चिल्लाई और उससे उसका आईडी प्रूफ़ मांगा."

अपनी पोस्ट में साम्या ने बताया है कि कैसे उन्होंने छेड़छाड़ करने वाले व्यक्ति का सामना किया और बस को पीछे मुड़कर पुलिस स्टेशन जाने के लिए मजबूर किया.

लेकिन बाद में जो हुआ उसे जानकार शायद उन लोगों को निराशा हाथ लगे जो सोशल मीडिया पर गुप्ता की तारीफ़ कर रहे थे.

गुप्ता ने अपनी पोस्ट में लिखा है कि क़रीब 40 साल की उम्र के उस आदमी ने अपनी ग़लती के लिए माफ़ी मांगी.

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बस में क़रीब 30 सवारियां और थीं जिन्होंने साम्या गुप्ता का समर्थन किया था. लेकिन उन्होंने सौम्या को मामले को आगे न बढ़ाने की सलाह भी दी थी.

गुप्ता ने लिखा, "मेरे सहयात्रियों ने मुझसे कहा कि मैं इसे स्वीकार करूं और बात को जानें दूं. लेकिन मैंने फ़ैसला किया कि खुले आम छेड़छाड़ करने वाले व्यक्ति को सिर्फ़ माफ़ी मांगने पर छोड़ूंगी नहीं."

गुप्ता ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने बस ड्राइवर को बस पुलिस स्टेशन ले जाने के लिए कहा.

बाक़ी लोगों ने छेड़खानी करने वाले व्यक्ति को घेरे रखा. लोगों ने दोनों को पुलिस स्टेशन पहुंचाया.

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साम्या गुप्ता ने उस व्यक्ति के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवाई. साम्या ने बताया, "शिकायत देने की प्रक्रिया लंबी और थकाऊ थी. मैं अंग्रेज़ी में शिकायत लिखना चाहती थी लेकिन पुलिस ने मुझसे हिंदी में शिकायत लिखवाई"

उन्होंने बताया, "मैं क़ानून की छात्रा हूं. मुझे ही ये प्रक्रिया थकाऊ और लंबी लगी. उन महिलाओं का सोचिए जो पढ़ी-लिखी नहीं हैं."

वो बताती हैं कि शिकायत देने के बाद उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं.

साम्या ने बताया, "जब मैं दूसरी बस में सवार हो गई तो छेड़खानी करने वाले व्यक्ति के कई साथियों ने मुझ पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया."

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मामले की सुनवाई के लिए अदालत ने तारीख़ भी तय कर दी. लेकिन सुनवाई से पहले ही साम्या गुप्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने इसकी कई वजहें बताईं.

उन्होंने बताया, "मेरी शिकायत के साथ मेरा मोबाइल नंबर छेड़खानी करने वाले व्यक्ति के परिवार को मिल गया. मेरे पास उन लोगों के कई फ़ोन कॉल आए."

वो कहती हैं कि उन्हें उनके परिवार वालों ने भी मामला रफ़ा दफा करने की ही सलाह दी.

उन्होंने बताया, "उनका मानना है कि छेड़खानी इतनी गंभीर समस्या नहीं है जिसके लिए अदालत के चक्कर लगाए जाएं."

साम्या कहती हैं, "मैं अपने पैसे नहीं कमाती हूँ. मैं एक छात्रा हूँ और मेरे परिवार में किसी को क़ानून की जानकारी नहीं है. मेरा पुलिस स्टेशन जाना ही मेरे परिवार के लिए बड़ी बात थी. मैंने परिजनों के दबाव में शिकायत वापस ले ली."

वहीं स्थानीय पुलिस का कहना है कि पुलिस ने मामले में क़ानूनी प्रक्रिया का ही पालन किया.

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इंस्पेक्टर शिव मंगल सिंह ने बीबीसी को बताया, "लड़की और उसके पिता थाने आए और उन्होंने शिकायत वापस लेने के लिए कहा."

लड़की का फ़ोन नंबर अभियुक्त के परिवार को मिलने के बारे में उन्होंने कहा कि ऐसा पुलिस की ओर से नहीं हुआ है.

इंस्पेक्टर मंगल सिंह ने बताया कि लड़की के शिकायत वापस लेने के बावजूद छेड़खानी करने वाले व्यक्ति को कई और दिन न्यायिक हिरासत में बिताने होंगे क्योंकि जिस धारा के तहत उसे गिरफ़्तार किया गया है उसमें 14 दिनों से पहले ज़मानत होती ही नहीं है.

उन्होंने कहा, "हम छेड़छाड़ को बहुत गंभीरता से लेते हैं. हमारा एक व्हाट्सएप नंबर भी है जिस पर लड़कियां छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज करवा सकती हैं."

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