वायरल वीडियो पर पेटीएम सीईओ ने तोड़ी चुप्पी

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पेटीएम मोबाइल पेमेंट ऐप के बाद अब उसके संस्थापक विजय शेखर शर्मा ख़ासी चर्चा में हैं. वजह है कंपनी के सालाना जलसे में उनका डांस और चीखते हुए बोले गए कुछ शब्द.

इस मामले में अब उन्होंने सफाई देते हुए लिखा है कि शब्दों के चुनाव में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए थी.

अपने ट्विटर हैंडल और फ़ेसबुक पन्ने पर लिखे एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, "मैं बीते तीन दिन से देश से बाहर था और अभी-अभी सोशल मीडिया पर नज़र दौड़ा रहा हूं. मैं देख रहा हूं कि पेटीएम के सालाना कार्यक्रम को लेकर लोग काफ़ी बात कर रहे हैं और यह थोड़ा अटपटा भी लग रहा है."

विजय शेखर ने लिखा, "उस दिन अपने हज़ारों साथियों की कोशिशों से मैं काफी उत्साहित था. मैं उनके उत्साह के लिए ज़िम्मेदारी के साथ रोज़ काम पर आता हूं और मैं उन सभी को बताना चाहता हूं कि हम उनके काम की सराहना करते हैं और उनका काम बेहद ज़रूरी है."

उन्होंने लिखा, "वो हमारे साथ काम करने वाले दोस्तों और हमारे पार्टनर्स की मेहनत का जश्न था, हमारे काम का प्रदर्शन नहीं."

वो लिखते हैं, "मैं मानता हूं कि शब्दों के चुनाव में मैं थोड़ी सावधानी बरत सकता था. मैंने कभी किसी चीज़ का फायदा नहीं उठाया और आगे भी ऐसा नहीं करूंगा."

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नोटबंदी से इनके हुए वारे-न्यारे

उनके इस माफ़ीनामे पर कई लोग नाराज़ हैं और कई कहते हैं कोई बात नहीं.

सोहेल गुप्ता लिखते हैं, "जब नशे में हों तो सच्चाई अपने आप निकलती है."

कविता चोपड़ा दीक्षित ने लिखा, "मुझे लगता है कि मामले को बिना बात बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है."

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शिवेश पटेल लिखते हैं, "ठीक लिखा है. आपको शर्म करने की ज़रूरत नहीं है. हां मानते हैं कि आप बेहतर शब्द चुन सकते थे."

बीते सप्ताह सामने आए एक वीडियो में विजय शेखर को स्टेज पर नाचते और चिल्लाते देखा गया था. उन्होंने कहा था, "जो हमारे साथ नहीं हैं, वो रोएंगे."

कई बार मुट्ठी बंद कर के वो खुशी से चीखते नज़र आए.

बीते साल नोटबंदी की घोषणा के बाद से लोगों ने कैशलेस पेमेंट का रुख़ किया था जिसके बाद पेटीएम को लाखों नए ग्राहक मिले थे.

ट्विटर पर अलंकार ने लिखा, "नोटबंदी से हम लोगों को मुसीबत और परेशानी हुई, इससे पेटीएम के वारे-न्यारे हो गए."

योगेंद्र सिंह ने लिखा, "मैंने अभी-अभी ये ऐप अनइंस्टॉल कर लिया है. इस वीडियो को देखने के बाद आप भी ऐसा ही करने वाले हैं."

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नोटबंदी के तुरंत बाद पेटीएम ने देश के सभी मुख्य अख़बारों में प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर के साथ विज्ञापन दिया था.

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चौतरफा आलोचना होने के बाद विजय शेखर को कहना पड़ा था, "हम तो केवल एक स्टार्टअप हैं और भारत में फाइनेंशियल इन्क्लूज़न की कोशिश कर रहे हैं."

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