'उपहार कांड: एक मौत की सज़ा बस 6 दिन जेल'

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption गोपाल अंसल (फ़ाइल फ़ोटो)

उपहार सिनेमाघर में आग लगने से हुए हादसे के मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गोपाल अंसल को एक साल सज़ा काटने का हुक़्म सुनाया.

उनके भाई सुशील अंसल पहले ही 12 महीने जेल में बिता चुके हैं, ऐसे में उन्हें अब कोई सज़ा नहीं काटनी होगी.

गोपाल चार महीने जेल में गुज़ार चुके हैं, ऐसे में अब उन्हें आठ महीने और सज़ा काटनी होगी.

इमेज कॉपीरइट BBC/Kirtish

इस फ़ैसले पर सोशल मीडिया पर लोग निराशा जता रहे हैं.

साल 1997 में 13 जून को हुई इस दुर्घटना में 59 लोग मारे गए थे, जबकि 100 से ज़्यादा घायल हुए. मृतकों में बच्चे भी काफ़ी थे.

इमेज कॉपीरइट Twitter

ओज़िल अम्बर ने लिखा है, ''1 साल जेल की सज़ा...ये भी क्यों...उन्हें बेगुनाह साबित कर दीजिए ना...न्यायपालिका में आम आदमी को नज़रअंदाज़ करने की इंतेहा है.''

शशि शर्मा ने लिखा है, ''एक साल की सज़ा. 59 लोग मारे गए. यानि हर बेगुनाह की मौत के लिए 6.186 दिनों की सज़ा.''

साल 2007 में अंसल बंधुओं को दो साल जेल की सज़ा हुई थी. एक साल बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने इसे घटाकर एक साल कर दिया.

इमेज कॉपीरइट Twitter

साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर मुहर लगाई और आगे जेल भेजने के बजाय दोनों पर 30-30 करोड़ जुर्माना लगा दिया.

रवि कपूर उस बदनसीब दिन उपहार सिनेमाघर में बॉर्डर फ़िल्म देखने पहुंचे थे. कोर्ट के फ़ैसले से वो भी निराश दिखे.

इमेज कॉपीरइट Twitter

@RaviKapoor हैंडल से उन्होंने लिखा है, ''उपहार में जो हुआ, वो त्रासदी थी. दुआ करता हूं कि फिर कभी इस तरह के हादसे का गवाह ना बनूं. न्यायपालिका को केस के अंजाम तक पहुंचने में 20 साल लग गए.''

उन्होंने आगे लिखा है, ''आज भी ग्रीन पार्क में उपहार सिनेमा जाएंगे, तो वहां बॉर्डर फिल्म का आधा जला पोस्टर मिल जाएगा. जले हुए जूते और बैग भी. शायद झुलसी हुई संवेदनाएं भी.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे