सोशल: भाजपा की जीत पर क्या बोले मुसलमान?

  • 11 मार्च 2017
भारत के मुसलमान इमेज कॉपीरइट Getty Images

एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट न देने वाली भारतीय जनता पार्टी ने यूपी में 312 सीटें जीतकर तीन-चौथाई बहुमत हासिल कर लिया है.

यूपी में नतीजे पूरी तरह से आ चुके हैं. विधानसभा में अब तक सत्ता पक्ष की कुर्सियों पर बैठने वाली समाजवादी के 47 विधायक ही जीत पाए.

मायावती की बसपा की खराब हालत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनकी पार्टी के महज 19 विधायक ही चुने जा सके हैं.

बहुजन समाजवादी पार्टी ने सबसे ज़्यादा मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिए थे. नतीजे और रुझान सामने आने के बाद क्या बोले मुसलमान, आप भी पढ़िए.

पढ़िए भाजपा की इस ऐतिहासिक जीत पर क्या सोचते हैं मुसलमान

अमीक जामेई ने लिखा, "उत्तर प्रदेश हिंदुत्व के हाथ गया, इस हाल के लिए बिहार की तर्ज़ का महागठबंधन का न बनना ज़िम्मेदार है, अखिलेश यादव को लोगों ने चुनाव विकास के नाम पर लड़ने का सुझाव दे मिसगाईड किया है जबकि भाजपा ने दलित व पिछड़ो मे ही सेंध मारी है मतलब सोशल इंजीनियरिंग कर विशाल जीत की तरफ़!"

मोहम्मद जाहिद ने फ़ेसबुक पर लिखा, "यह चुनाव परिणाम सपा और बसपा के वोटरों में भाजपा और नरेंद्र मोदी की तरफ चले जाने का संकेत है. मुस्लिम वोटरों के लिए मार कर रही सपा-बसपा अपने ही अन्य परंपरागत वोट भाजपा की तरफ जाने से ना रोक सके."

मोहम्मद ख़ालिद हुसैन ने लिखा, "उत्तर प्रदेश में भाजपा अपनी ध्रुवीकरण की राजनीति में सफल रही. भाजपा की अप्रत्याशित जीत यह बताती है की आज भी देश के लिए ग़रीबी, बेरोज़गारी, भुखमरी इत्यादि जैसी समस्या से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण शमशान और राम मंदिर ही हैं."

मोहम्मद उस्मान ने लिखा, "जिन लोगों को थाने में दो मुसलमान सिपाहियों के बजाए 18% आरक्षण चाहिए था वो अब एक एफआईआर करके दिखा देना."

शादमान अली ने लिखा, "मुसलमान सपा बसपा को वोट दिए, बाकी दलित यादव भाजपा के साथ चले गए."

अली ख़ान ने लिखा, "बिहार में मुसलमान एक हुआ था, सेकुलर एक था, लेकिन यूपी में बंट गया या बाँटा गया..?"

अली सोहराब ने लिखा, "मुसलमान वोटों को मायावती ने गद्दार कहा था, शीला भी कह चुकी हैं. अब अखिलेश भी गद्दार कह देंगे."

अफ़रोज़ आलम साहिल ने लिखा, "यूपी कम्यूनल पॉलिटिक्स की एक नई प्रयोगशाला बनकर उभरी है."

सलमान सिद्दीकी के मुताबिक, "इस बार वोट जाति के आधार पर नहीं, धर्म के आधार पर पड़े हैं! बाकी सब बातें हैं...बातों का क्या... !

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