सोशल: इस प्यारी चिड़िया को क्यों याद कर रहे हैं लोग?

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Image caption दीपक कुलश्रेष्ठ ने ट्विटर पर गोरैया के लिए ये कविता पोस्ट की

आज विश्व गोरैया दिवस है और लोग सोशल मीडिया पर इस चिड़िया को याद कर रहे हैं. #worldsparrowday ट्विटर पर ट्रेंड्स में भी शामिल रहा.

लोग विश्व गोरैया दिवस के बहाने गोरैया से जुड़ी अपनी यादें सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं.

ताकि ग़ायब न हो जाए गौरैया....

शहरों से गायब हो रही गौरैया

गोरैया बचाओ पेज से फ़ेसबुक पर लिखा गया, "कहीं गयी नहीं है अपनी प्यारी गोरैया, रूठ गयी है बस, हमें उसे मनाना होगा देकर थोड़ा दाना पानी, प्यार से बुलाना होगा."

ध्रुव गुप्त ने फ़ेसबुक पर लिखा, "गोरैया हमारे जीवन और हमारी दिनचर्या के बेहद क़रीब रही है हमेशा से. वह घर के सहन में भी है, मुंडेर पर भी है, छत पर भी, आंगन में भी, कमरे में भी, बिस्तर पर भी और जब आप अवसाद में हैं तो आपके कंधे पर भी. घर से बाहर तक, आंगन से सड़क तक हमारी मासूमियत का विस्तार है गोरैया."

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Image caption ये तस्वीर ब्रज भूषण दुबे ने अपने फ़ेसबुक पर पोस्ट की है

ब्रज भूषण दुबे ने गोरैया के लिए कृत्रिम घोंसला बनाने और उसमें गोरैया के आकर रहने का अनुभव साझा करते हुए फ़ेसबुक पर लिखा, "गोरैया के लिये नेस्‍ट बाक्‍स बडी उत्‍सुकता के साथ लगाया था नीबू के पौधे में. बच्‍चे रोज मिट्टी के बर्तन में पानी एवं चावल, बाजरा आदि गौरैया को खाने के लिए रखते थे. हमेशा निहारा करते थे कि कोई गौरैया इस कृत्रिम घोंसले में आ जाय. महीनों की मेहनत सफल हुई. तीन चार गोरैया इस लकड़ी के घोंसले में आ जा रही हैं, चोंच में कुछ खर पतवार लेकर. अब इस घोंसले में रहने के साथ-साथ प्रजनन भी होगा."

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गोपाल गिरधानी ने ट्विटर पर लिखा, "ओ री चिरैया, नन्हीं सी चिड़िया, अंगना में फिर आजा रे....!"

आशु अग्रवाल ने ट्वीट किया, "वो दिन याद आते हैं जब सुबह आंख गोरैया की चहचहाट से खुलती थी. आइये इस ख़ूबसूरत चिड़िया को बचाने की शपथ लें."

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