सोशल: राम मंदिर मुद्दे पर कोर्ट के सुझाव पर क्या बोले लोग?

  • 21 मार्च 2017

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण एक संवेदनशील मुद्दा है और इसे अदालत के बाहर आपसी बातचीत से सुलझाना चाहिए.

अदालत ने ये भी कहा है कि ज़रूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता करने के लिए तैयार है.

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद से ही सोशल मीडिया पर राम मंदिर, बाबरी और अयोध्या ट्रेंड्स में शामिल हैं.

बहुत से लोगों ने अयोध्या में जल्द ही राम मंदिर बनने की उम्मीद ज़ाहिर की है तो कुछ लोगों ने पूछा है कि बाबरी विध्वंस और फिर भड़के दंगे की जवाबदेही कब तय होगी.

पढ़ें- राम मंदिर मसला आपस में सुलझाएँ: सुप्रीम कोर्ट

'अदालत का काम समझौता कराना नहीं'

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या बोला

अब्दुल्ला मदुमूले (@AMadumoole) ने लिखा है, "क्या सुप्रीम कोर्ट डरा हुआ है कि हिंदुवादी पार्टियां इसके फैसले को नहीं मानेंगी? उस हालात में चीजें उलट पटल जाएंगी."

मुजीब अंसारी ने (@Mujibansari6) ने लिखा है, "राम मंदिर, बाबरी मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम, ये सब मुद्दे जल्द से जल्द हल कर लेने चाहिए ताकि भारत विकास के बारे में बात कर सके."

इशकरण भंडारी (@Ish_Bhandari) ने ट्वीट किया, "कुछ आम लोगों को समझ नहीं आएगा लेकिन ये राम मंदिर बनाने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा क़दम है."

शेषमणि दुबे (@SheshmaniDube) ने लिखा, ''सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में राम मंदिर बनाने के रास्ते में आने वाली सभी अड़चनों को हटाया जाए.''

Image caption सुब्रमण्यम स्वामी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

मोतीलाल दास (@MotiAryan) ने ट्वीट किया, "राम मंदिर निर्माण में भी कोई अड़चन नहीं रही, सर्वोच्च न्यायालय ने भी इसे आपस में ही सुलझाने को कहा. ये कोर्ट का कोई मुद्दा ही नहीं."

गिरीश कुकरेजा (@girishkukreja9 ) ने ट्वीट किया, "राममंदिर मुद्दे पर भारतीय मुस्लिम भाइयों को 80 करोड़ हिन्दुओं की आस्था का मान रख भाईचारे की मिसाल कायम करनी चाहिए. श्रीराम मंदिर निर्माण कर नफ़रत खत्म हो."

कृष्ण मुरारी शास्त्री (@Diyamurari) ने लिखा, "हिन्दू बहुल राष्ट्र में "प्रभु श्री राम" की जन्मस्थली पर उन्हीं का मंदिर बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. आख़िर कब तक तारीख पर तारीख."

रविंद्र सुराडकर (@AnkushRavindra) ने लिखा, "हिंदू और मुसलमान आपस में बैठकर राम मंदिर का मसला सुलझा सकते हैं, इससे भाईचारे की भावना बढ़ेगी."

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शहज़ाद पूनावाला ने (@Shehzad_Ind) ने लिखा है, "मैं मध्यस्थता को लेकर सीजेआई की भावना का सम्मान करता हूं, लेकिन बाबरी मस्जिद के ध्वंस और उसके बाद हुए दंगों से संबंधित कानूनी सज़ा का क्या होगा."

साडडा हक़!!ऐत्थे रख़!!‏ (@PRAMODKAUSHIK9) ने लिखा, "दोनों पक्षों में राम मन्दिर मसला हल करने की समझ होती तो आज भाजपा किसी गली के नुक्कड़ पर सभा करते हुए क्षेत्रीय दल बनने का प्रयास कर रही होती."

शालिनी‏ (@shreha211985) ने ट्वीट किया, "अगर राम मँदिर अब नहीं बना तो कभी नहीं बनेगा."

अभिषेक माथुर (@abhimay) ने ट्वीट किया, "सुलह अगर होनी होती तो कई साल पहले हो जाती, सुप्रीम कोर्ट बच के निकलने की कोशिश में है जो संभव नहीं. राम मंदिर का निर्माण होगा और होगा."

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असदद्दुन ओवैसी (@asadowaisi) ने लिखा है, "मैं उम्मीद करता हूं कि सुप्रीम कोर्ट उस अवमानना की याचिका पर भी विचार करेगा जो 1992 में बाबरी मस्जिद ध्वंस के समय से ही लंबित है."

नदीम असरार (@_sufiyana) ने लिखा है, "मोदी पीएम हैं, अवैद्यनाथ सीएम हैं और सुप्रीम कोर्ट अपनी बुद्धिमानी में चाहता है कि बाबरी मस्जिद- राम मंदिर विवाद का कोर्ट के बाहर हर निकल जाए."

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