सोशलः 'तुम मुझे शराब दो, मैं तुम्हें कबाब दूंगा'

  • 24 मार्च 2017
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनते ही यूपी में प्रशासन मीट कारोबारियों के ख़िलाफ तेजी से कार्रवाई कर रहा है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशासन के इस कदम से लखनऊ का मशहूर रेस्त्रां टुंडे कबाबी भी एक दिन के लिए बंद रहा.

अब इस टुंडे कबाबी रेस्त्रां में बीफ तो नहीं, लेकिन चिकन और मटन परोसा जा रहा है.

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टुंडे कबाबी के कुछ वक्त के लिए बंद होने और बूचड़खानों पर हो रही कार्रवाई की चर्चा सोशल मीडिया पर भी है.

कुछ लोग प्रशासन के इस फैसले की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ लोग इसे गलत बता रहे हैं. पढ़िए किसने क्या लिखा?

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विनोद गुप्ता लिखते हैं, ''टुंडा लाख कबाब चाहे तो क्या होता है. वही होता है जो मंज़ूर-ए-योगी होता है.''

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खुद को कांग्रेसी समर्थक बताने वाले @sunny_congress ने लिखा, ''मानसिक रूप से टुंडों ने टुंडे कबाब भी बंद करवा दिए.''

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सत्यम त्रिपाठी ने ट्वीट किया, ''मैं लखनऊ से हूं और जानता हूं कि टुंडे कबाब वाले अवैध बूचड़खानों से आधे दामों में मीट खरीदते थे. इसके लिए टैक्स भी नहीं दिया जाता है.''

@idi8s_Xpozed ने लिखा, ''अगर कोई सोचता है कि लखनऊ का मतलब सिर्फ टुंडे कबाब है, ऐसे लगों को फौरन अफ्रीका शिफ्ट हो जाना चाहिए.''

मनीष सिंह ने लिखा, ''अब टुंडे कबाब नहीं मिलेंगे. अब सिर्फ घास-फूस खाओ. दुःखद''

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@nishantspn ने ट्वीट किया, ''ऐसा लग रहा है कि अब तक देश की अर्थव्यवस्था टुंडे कबाब से ही चल रही थी.''

पत्रकार उमंग मिश्रा ट्विटर पर लिखते हैं, ''कबाब पर कोई रोक नहीं लगी है. चाहे टुंडे बनाएं या पांडे. अगर अवैध बूचड़खाने की वजह से कच्चा माल सस्ता था तो कबाब महंगा कर दें. अवैध के साथ न जाएं.''

@DIXIT_G ने ट्वीट किया, ''पूरे यूपी ने एकजुट होकर गौ हत्या बंद करवाने के लिए बीजेपी को वोट दिया और ये मीडिया वाले टुंडे कबाब खाने के लिए रो रहे हैं. हद है.''

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रवि भदौरिया लिखते हैं, ''टुंडे के कबाब बिक गए बीबी, या हबीबी. या हबीबी. या हबीबी.''

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