सोशल: 'आप सूरज को सलाम करो, हमें नमाज़ पढ़ने दो'

  • 30 मार्च 2017
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उत्तर प्रदेश में योग महोत्सव के मौक़े पर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा सूर्य आसन में हमारे जितने आसन हैं और जितनी मुद्राएं आती हैं वे मुस्लिम समुदाय की नमाज़ से मिलती-जुलती हैं. इस पर सोशल मीडिया में काफ़ी प्रतिक्रियाएं आईं.

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हमने बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पन्ने पर लोगों से योगी के इस बयान पर राय जाननी चाही. हमारे पाठकों ने बड़ी संख्या में इस मुद्दे पर अपने विचार रखे.

हमारे एक पाठक अज़ीज़ चौधरी लिखते हैं, "पूजा और इबादत के तरीके बताना और उनमें समानता, असमानता बताना सरकार का काम नहीं है. ये हर एक आदमी की मर्ज़ी पर निर्भर है कि वो क्या करे क्या ना करे.सरकार बिजली, पानी, और सड़क पर ध्यान दे तो बेहतर है."

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सारा अली लिखती हैं, "दोनों एक ही बात है तो फिर प्रॉब्लम क्या है. आप सूरज को सलाम करो और मुसलमानों को नमाज़ पढ़ने दो."

तो वहीं सूरज सिन्हा ने लिखा कि योगी जी की इस बात का आज हर हिंदू और मुसलमान साथ में सपोर्ट कर रहा है.

नीतिश सिन्हा का मानना है, "सूर्य नमस्कार लाखों साल पुराना है. जबकि नमाज़ बस कुछ सौ साल पहले से अस्तित्व में आई. संभव है मुसलमानों की इबादत का ये तरीका सूर्य नमस्कार से प्रेरित हो."

तैय्यब ख़ान नाम के एक पाठक की राय है, "सूर्य नमस्कार में ईश्वर का ध्यान करते हैं और नमाज़ में भी अल्लाह का ध्यान होता है. दोनों से मन शांत होता है. लेकिन दोनों तरफ़ के कट्टरपंथी इस बात को क्या समझें."

अली अकरम लिखते हैं, "मैं सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ता था और सूर्य नमस्कार में कई पुरस्कार जीते हैं. लेकिन दोनों एक नहीं है. नमाज़ इबादत करना है और सूर्य नमस्कार एक तरह का व्यायाम है."

अरमान लिखते हैं, "सूर्य नमस्कार में सूरज की प्रार्थना की जाती है जबकि नमाज़ में सूरज को बनाने वाले अल्लाह की इबादत होती है. दोनों एक कैसे हो गए?"

ख़ालिद हसन के मुताबिक़, "योगी जी ने अच्छी बात कही है. योग का अर्थ होता है जुड़ना, जिन क्रियाओं से हम ईश्वर से जुड़ते है उसे योगा कहते हैं. नमाज़ में भी ख़ुदा से जुड़ते हैं."

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