सोशल: पासपोर्ट के लिए अब शादी या तलाक का सर्टिफिकेट नहीं देंगी महिलाएं

  • 13 अप्रैल 2017
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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार में भारतीय महिलाओं के योगदान की प्रशंसा की है.

वो इंडियन मर्चेन्ट चैंम्बर्स की महिला विंग के 50 साल पूरे होने पर हुए समारोह के दौरान महिला उद्यमियों को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि मां बहनों को सशक्त कर के ही देश प्रगति कर सकता है.

  • मोदी ने कहा कि सरकारी योजनाओं में इस बात के प्राथमिकता दी जा रही है कि पहला हक महिला का होगा.
  • उन्होंने बताया कि .सरकार की कोशिश है कि घर (प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य योजनाओं में) और संपत्ति महिलाओं के नाम पर रजिस्टर करने की कोशिशें की जा रही है.
  • उन्होंने कहा कि पासपोर्ट के नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं. पासपोर्ट बनाने के लिए अब महिला को अपनी शादी का या तलाक का सर्टिफिकेट देने के ज़रूरत नहीं होगी. ये महिला की इच्छा पर है कि वो पासपोर्ट में वो अपने पिता का नाम लिखवाए या मां का.

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  • हर व्यक्ति में एक उद्यमी होता है बस उसे सही समय और मार्गदर्शन की ज़रूरत है. उन्होंने लिज्जत पापड़ का उदाहरण देते हुए कहा, कि ये उद्योग कुछ आदिवासी महिलाओं ने कुटीर उद्योग की तरह शुरू किया था और आज घर घर में इसकी पहचान है.
  • महिलाओं के लिए यूनिवर्सल हेल्पलाइन 181 जारी की गई है.

पासपोर्ट में किए जा रहे इस बदलाव की सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है.

दीपक दूबे ने लिखा, "मुबारक को महिलाओं मोदी जी ने पासपोर्ट के ज़रिए आपको गिफ्ट दिया है. ये आपके आत्मसम्मान के लिए है, आपकी पहचान के लिए है."

वेलविशर नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, "अब कुछ सेकुलर पार्टियां ये कहेंगी कि महिलाओं के पास पासपोर्ट ही नहीं है. उन्हें कुछ और काम नहीं है."

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हालांकि सोशल मीडिया पर काफी लोगों का कहना है कि मोदी ने कहा है कि अब शादी के बाद महिलाओं को पासपोर्ट में अपना नाम बदलने की ज़रूरत नहीं होगी.

सैमसेस का कहना है, "मैंने अपना नाम नहीं बदला है. मुझे पता तक नहीं था कि महिलाओं के पासपोर्ट पर अपना नाम बदलना पड़ता है."

नारायणन पीवी ने लिखा, "क्या पहले इस तरह का कोई नियम भी था?"

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