सोशल: 'कश्मीरियों पर अत्याचार के वीडियो देख गुस्सा नहीं आता'

फ़ारुक़ अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला इमेज कॉपीरइट Getty Images

"मैं कश्मीर में सीआरपीएफ़ के जवानों के साथ हाथापाई के वीडियो से पैदा हुए आक्रोश को समझ सकता हूं. लेकिन मैं इस बात से परेशान हूं कि आर्मी की जीप पर बंधे कश्मीरी जवान को देखकर लोगों को उतना ही गुस्सा क्यों नहीं आता."

शुक्रवार सुबह जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट के ज़रिए यह सवाल किया.

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सेना का कहना है कि जीप से बंधे नौजवान वाले वीडियो की जांच-पड़ताल की जा रही है.

चिनार कोर ने ट्वीट किया है, ''सेना की जीप से बंधे नौजवान वाले वीडियो के बारे में: वीडियो के कंटेंट की जांच की जा रही है.''

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इस ट्वीट को भारतीय सेना के टि्वटर हैंडल से रीट्वीट भी किया गया है.

सोशल मीडिया पर उमर अब्दुल्ला के इस सवाल को भारतीय सीआरपीएफ़ के जवानों के साथ बदसलूकी के वायरल वीडियो के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है.

हालांकि, उमर अब्दुल्ला के इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं हो पाई है.

इस ट्वीट से पहले उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट के ज़रिए एक वीडियो भी शेयर किया, जिसमें एक शख़्स को आर्मी जीप के बंपर पर बंधा हुआ देखा जा सकता है.

साथ ही वीडियो में सुना जाता सकता है कि "कश्मीर के पत्थरबाज़ों का यही हाल होगा."

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उमर अब्दुल्ला ने लिखा, "कश्मीरी युवक पर अत्याचार के इस वीडियो को देखते हैं कितने न्यूज़ चैनल दिखाते हैं."

उमर अब्दुल्ला के समर्थन में कई ट्विटर यूज़र्स ने आर्मी की ऐसी ही सख़्त कार्रवाई संबंधित फ़ोटो शेयर किए.

कुछ लोगों ने ऐसे वीडियो भी शेयर किए हैं, जिनमें दावा किया गया है कि चुनाव के बाद कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने ही सीआरपीएफ़ के जवानों की सुरक्षित निकलने में मदद की.

बहरहाल, इसी बीच एक्टर अनुपम खेर ने जवानों के वीडियो को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी.

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खेर ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया. इसमें उन्हें कहते सुना जा सकता है कि कश्मीर में जवानों के साथ जो हुआ, वो नाकाबिले बर्दाश्त है.

खेर कहते हैं कि इसके ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए. साथ ही उन कथित सेकुलर लोगों को ख़ासतौर पर जवाब दिया जाना चाहिए, जो अकसर कश्मीर के लोगों को लेकर मानवाधिकार की दलीलें देते रहते हैं.

खेर ने वीडियो में यह भी कहा, "कश्मीर में हथियारबंद जवानों के साथ ऐसा हो सकता है, तो अंदाजा लगाइये कि 27 साल पहले बिना हथियारों के असहाय कश्मीरी पंडितों के साथ क्या किया होगा."

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