सोशल: एक लड़की के सोनू निगम से पूछे गए सवाल हुए वायरल

  • 20 अप्रैल 2017
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धर्मस्थलों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर सवाल उठाने वाले गायक सोनू निगम से एक लड़की ने सवाल किया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

ख़ुद का नाम यासमीन अरोड़ा मुंशी बताने वाली इस लड़की ने 17 अप्रैल को अपने फ़ेसबुक पेज पर सोनू निगम से सवाल करते हुए एक लाइव वीडियो पोस्ट किया था. 8 लाख बार देखा जा चुका है और डेढ़ लाख लोगों ने इसे शेयर किया है.

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इस लड़की ने सवाल किया था, "सोनू निगम जी, आप करीब 50 साल के हो गए हैं. आपको पचास साल बाद अचानक कैसे याद आया कि आपको अज़ान से तकलीफ़ होती है. क्या यह सवाल देश की हुकूमत देखकर उठाया गया है."

सोनू निगम ने ट्विटर पर अपने पोस्ट में धर्मस्थलों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर सवाल उठाए थे, जिसमें सबसे पहले अज़ान का ज़िक्र किया गया था.

सोनू निगम ने कहा था कि ये 'धार्मिक गुंडागर्दी है बस'.

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अपने वीडियो में यासमीन ने कहा, "जब गोमांस खाने के नाम पर महिलाओं से बलात्कार कर दिया जाता है, क्या उसे गुंडागर्दी नहीं कहते?"

यासमीन ने अपने वीडियो में कहा कि गौरक्षा के नाम पर पहलू ख़ान और अख़लाक़ की हत्या गुंडागर्दी नहीं थी? लेकिन तब आपने ट्वीट नहीं किया.

अपने वीडियो में यासमीन ने अपशब्दों का भी इस्तेमाल किया.

वहीं सोशल मीडिया पर कई अन्य मुस्लिम महिलाओं ने भी सोनू निगम के ट्वीट पर प्रतिक्रिया दी. इनमें लोगों ने सोनू के पक्ष और विपक्ष में राय पेश की.

एरीना अकबर ने फ़ेसबुक पर लिखा, ''मैं सोनू निगम से इस बात पर सहमत हूं कि सुबह की अज़ान के लिए लाउडस्पीकर इस्तेमाल नहीं होना चाहिए लेकिन इसको गुंडागर्दी का नाम देना कुछ ज़्यादा हो गया. गुंडागर्दी का मतलब होता है लूट-मार करना, ख़ून-ख़राबा करना, लेकिन किसी को नींद से उठाना गुंडागर्दी में शामिल नहीं है.''

एक और पोस्ट में एरीना सोनू निगम के ज़रिए गुंडागर्दी शब्द के इस्तेमाल की कड़ी निंदा करते हुए लिखती हैं, ''एक ग़लत शब्द का इस्तेमाल एक उचित दलील को भी नष्ट कर देता है. हां, मुसलमानों को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करना चाहिए. लाउडस्पीकर का इस्तेमाल रात 10 बजे से सुबह छह बजे के बीच नहीं करना चाहिए. लेकिन अज़ान को गुंडागर्दी कहना अत्यंत असंवेदनशील है.''

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Image caption एरीना अक़बर के सवाल

लेकिन इसी के साथ वो आगे ये भी लिखती हैं, ''जहां अलग-अलग धर्मों के लोग रहते हैं वहां मुसलमानों को अपने पड़ोसियों की नींद का ख़्याल रखना चाहिए और सुबह को लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ये मामूली सा शिष्टाचार है.''

उनके अनुसार रमज़ान में ख़ासकर सुबह की अज़ान से पहले बार-बार घोषणा करना कि अब रोज़े में 10 या पांच मिनट बाक़ी हैं, ग़ैर-मुस्लिम लोगों को परेशान करना है.

वो आगे लिखती हैं, ''क़ुरान में भी मुसलमानों को पड़ोसियों के अधिकारों के बारे में नसीहत दी जाती है, लेकिन रमज़ान में लाउडस्पीकर से लगातार घोषणा करते रहने से हम अपने पड़ोसियों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं. मैं खाड़ी के एक देश में रही हूं और लाउडस्पीकर का ऐसा इस्तेमाल मैंने वहां नहीं देखा. तमाशाबाज़ी तो हम भारतीयों को ही आती है, चाहे वो जागरण हो या रमज़ान में बार-बार की जाने वाली घोषणाएं.''

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