सोशल: 'मोदी जी दफ्तर बस में आएँ तो मानें'

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भारत सरकार ने फैसला लिया है कि नेता और आला अधिकारी सड़कों पर चलते समय अब लाल बत्ती वाली गाड़ियों का इस्तेमाल नहीं करेंगे.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा, "प्रधानमंत्री ने कैबिनेट को नीले, लाल और सफेद लाइट के इस्तेमाल के बारे में अपने फैसले के बारे में बताया है. उन्होंने कहा है कि 1 मई से नेताओं और आला अधिकारियों की गाड़ियों पर लाल बत्ती लगाई नहीं जाएगी."

उन्होंने कहा, "कानून की किताब में लाल बत्ती के संबंध में जो प्रावधान है उसे ही हटाया जा रहा है. नीली लाइट केवल इमरजेंसी सर्विस जैसे कि एंबुलेंस, पुलिस की गाड़ी या फायर ब्रिगेड पर की गाड़ियों लगेगी."

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इसके बाद आत्मानंद के ट्वीट का जवाब देते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने लिखा, "सभी भारतीय ख़ास हैं, सभी भारतीय वीआईपी है."

इस पर अमल करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपनी गाड़ी की एक तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की.

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Image caption महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने भी अपनी गाड़ी की तस्वीर सोशल मीडिया में पोस्ट की.

मोदी सरकार के इस फैसले का कई लोग स्वागत कर रहे हैं.

वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लिखा, "प्रधानमंत्री कह रहे हैं सभी भारतीय एक बराबर हैं. इसकी परीक्षा तब होगी जब कोई असल वीआईपी एयरपोर्ट पर कतार तोड़ कर आगे आएगें या ट्रैफिक में ख़ास सम्मान लेंगे."

कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने भी इसके लिए मोदी सरकार को बधाई दी है. उन्होंने लिखा, "अब आप सभी भारतीयों को उसी प्रकार की सुरक्षा दें जो सभी वीआईपी लोगों को मिल रही है."

लेकिन सोशल मीडिया पर कई लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या इससे वाकई वीआईपी कल्चर समाप्त हो जाएगा.

अविराज सिंह लिखते हैं, "वैसे तो हर भारतीय वीआईपी है लेकिन कुछ वीआईपी को हाईवे पर टोल नाकों पर पैसे नहीं देने पड़ते और कुछ को निजी सुरक्षा मिली हुई है."

अमृत दासगुप्ता पूछते हैं, "क्या वो लोग कमांडो सुरक्षा और कारों की लाइन को भी ख़त्म करेंगे?"

एवेंजर नाम के एक ट्विटर हैंडल ने लिखा, "मोदी जी दफ्तर जाने के लिए आप और आपके मंत्री बसों का इस्तेमाल कीजिए. नहीं तो लाल बत्ती के ख़िलाफ़ ये मुहिम एक धोखा है, जुमला है."

मधुमिता बार्कतकी ने लिखा, "गायक्वाड वीआईपी कल्चर का उदाहरण हैं, तभी तो वो बच गए."

शिव सेना सांसद रवींद्र गायक्वाड़ के हवाई यात्रा करने पर बैन लगाया गया था. उन पर एयर इंडिया के एक कर्मी ने उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है. बाद में बैन हटा लिया गया.

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शुभ्रांशु बनर्जी ने लिखा, "रेलवे और एयरपोर्ट पर वीआईपी लाउंज भी क्यों नहीं हटा देने चाहिए."

कालिम शेख लिखते हैं, "लाल बत्ती हटा लेने से वीआईपी कल्चर ख़त्म नहीं होगा, जो कि इसमें दिखता है....'जानते हो मैं कौन हूं.' "

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