सोशल: मोदी सरकार से लोगों ने पूछा, अच्छे दिन, नौकरी बिन?

  • 17 मई 2017
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मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर उनके वादों की जांच-पड़ताल जारी है. इस बीच सबसे ज़्यादा बात जिस वादे की हो रही है वह है नौकरी और रोज़गार.

आम चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने देश में हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन आज ज़मीनी सच्चाई इससे दूर नज़र आती है. ट्विटर पर '#अच्छे दिन नौकरी बिन' ट्रेंड कर रहा है. लोग इस पर काफ़ी बातें कर रहे हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो आईटी सेक्टर में 2 लाख लोगों की नौकरियां जाने वाली हैं और महिलाओं के नौकरी छोड़ने की दर में भी इज़ाफ़ा हुआ है.

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ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग खुलकर अपने ग़ुस्से का इज़हार कर रहे हैं.

काकावाणी नाम के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया,''मोदी के तीन सालों में शिक्षा के नाम पर निकर हाफ़ से फ़ुल की गई, निंदा नाम की मिसाइल बनाई गई और गौरक्षा नामक रोजगार दिया गया.''

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सेकुलर बाबा नाम के ट्विटर यूजऱ ने लिखा,''अगर एक लाइन में मोदी सरकार के बारे में बताना हो तो कहेंगे,''भोली सूरत दिल के खोटे, नाम बड़े और दर्शन छोटे.''

आशीष ने लिखा,''मैंने चाय बेची, अब सभी युवाओं से चाय बिचवाऊंगा और सबको प्रधानमंत्री बनवाऊंगा.''

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हालांकि कुछ लोगों का यह भी मानना है कि जनता को सब्र करने की ज़रूरत है. देव राजपुरोहित ने ट्वीट किया,''आपने नेता चुना है, जादूगर नहीं. कृपया थोड़ी और प्रतीक्षा करें.''

द फोकट गाय नाम के ट्विटर यूज़र ने चुटकी ली,''अच्छे दिन नौकरी बिन, हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं.''

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अनिल कुमार यादव ने लिखा,''अच्छे दिन भी मिस्टर इंडिया के अनिल कपूर की तरह होते हैं. जब होते हैं तब दिखाई नहीं देते और जब नहीं होते हैं तब शोर ही शोर.''

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संजय माने ने बीबीसी के फ़ेसबुक पेज पर कहा,''बीजेपी बोलने में विश्वास करती है, करने में नहीं. जो लोगों को कालाधन न दे सकी, वो नौकरियां क्या देगी. नौकरियां तो देंगे अभी तो तारीख़ तय नहीं कर सके.''

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अंकिता सिंह ने कहा,''क्या बेवकूफ़ी है. दो करोड़ नौकरियां? जॉब पैदा करने से नहीं बल्कि जो जॉब हैं उन्हीं में सेलेक्शन पाने से होगा.'' मोहम्मद उजैर ने लिखा,''हम सब बेवकूफ़ हैं. अमित शाह जी पहले ही कह चुके हैं कि अच्छे दिन एक जुमला था.''

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