फ़ेसबुक की तर्ज़ पर 16 साल के ज़ेयान ने बनाया कश्मीर का काशबुक

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Image caption ज़ेयान शफीक़ हॉस्टल में रहते हैं और 11वीं में पढ़ते हैं.

भारत प्रशासित कश्मीर के 16 साल के छात्र ज़ेयान शफ़ीक़ कश्मीर के लिए सोशल मीडिया वेबसाइट बनाने के बाद से सुर्ख़ियों में हैं.

मूलरूप से अनंतनाग के रहने वाले ज़ेयान 11वीं में पढ़ते हैं और राजौरी के एक हॉस्टल में रहते हैं.

कश्मीर में तनाव के माहौल में सरकार ने कई बार सोशल मीडिया वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाया है. यही प्रतिबंध ज़ेयान के लिए कुछ करने का मौक़ा बन गया.

अपने हॉस्टल से फ़ोन पर बीबीसी से बात करते हुए ज़ेयान ने कहा, "मैंने और मेरे दोस्त उज़ैर ने 2013 में सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट बनाने की कोशिश की थी. लेकिन तब हम उसे आगे नहीं बढ़ा पाए थे."

उन्होंने बताया, "हाल ही में कश्मीर में अफ़वाह थी कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लग जाएगा. मैंने और उज़ैर ने फिर से अपने पुराने आइडिया पर काम करने का सोचा और बहुत ज़ल्द ही काशबुक वेबसाइट तैयार कर दी."

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Image caption काशबुक देखने में फ़ेसबुक जैसी ही लगती है.

अब तक kashbookkb.com से तीन हज़ार से अधिक कश्मीरी जुड़ चुके हैं. ये वेबसाइट अभी काफ़ी धीमी चल रही है और ज़ेयान इसे रफ़्तार देने में जुटे हैं.

ज़ेयान कहते हैं, "सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के दौरान कश्मीर में आपस में बात करना बेहद मुश्किल हो जाता है. ऐसे में लोग हमारी वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं."

वेबसाइट और एप्लीकेशन बनाने के लिए कोडिंग करना सीखना होता है. 16 साल के ज़ेयान ने ये कहां से सीखा?

वो बताते हैं, "मैंने यूट्यूब वीडियो देखकर और इंटरनेट पर लेख पढ़कर कोडिंग सीखी है. मैं हमेशा से कश्मीर के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खड़ा करना चाहता था."

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Image caption हाल ही में कश्मीर में कई बार सोशल मीडिया वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगा है.

ज़ेयान फ़ोन पर बीबीसी से बात कर ही रहे थे कि उनके वॉर्डन आ गए और उन्हें फ़ोन काटना पड़ा. बाद में दोबारा कॉल कर उन्होंने बताया, "ये वेबसाइट बनाने में मेरे दोस्त उज़ैर की अहम भूमिका है."

ज़ेयान कहते हैं, "कश्मीर में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगना आम बात होती जा रही है. कश्मीर के युवा भी बाक़ी दुनिया की तरह एक दूसरे से जुड़ना चाहते हैं, कुछ करना चाहते हैं."

वो कहते हैं, "मैं बहुत ख़ुश हूं कि मेरी ये कोशिश कश्मीर के लोगों को आपस में जोड़ पा रही है."

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Image caption भारत प्रशासित कश्मीर में कई महीनों से तनाव है. अब यहां छात्राएं भी पत्थरबाज़ी में शामिल हो गई हैं.

ज़ेयान को उम्मीद है कि एक दिन उनकी ये वेबसाइट बड़ी हो जाएगी. वो कहते हैं, "मार्क ज़करबर्ग ने जब फ़ेसबुक बनाया था तब उसमें भी बहुत सी कमियां थी. अब तेरह साल बाद वो इतनी परफ़ेक्ट है. हमारे काशबुक में भी कमियां हैं, जिन्हें हम धीरे-धीरे दूर कर लेंगे."

ज़ेयान और उज़ैर के सामने संसाधनों की कमी बड़ी समस्या थी. वो कहते हैं, "हमारे पास इतने पैसे भी नहीं थी कि हम डोमेन ख़रीद पाते. हमें प्रोत्साहन मिले तो हम बहुत कुछ कर सकते हैं."

ज़ेयान का इरादा कश्मीर के लिए इंटरनेट पर एक मार्केट्प्लेस (ऑनलाइन बाज़ार) खड़ा करने का भी है.

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