सोशल: 'इस पार्टी को 44 से 4 होने की इतनी जल्दी क्यों है?'

  • 29 मई 2017
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केरल में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर कथित तौर से सरेआम गाय काटने का आरोप लगा है और यह मामला तूल पकड़ रहा है.

केरल के बीजेपी अध्यक्ष कुम्मनम राजशेखरन ने ट्विटर पर इससे संबंधित एक वीडियो शेयर किया था. राजशेखरन ने लिखा था, ''क्रूरता चरम पर है. दिन के उजाले में यूथ कांग्रेस के नेताओं ने मवेशियों का वध किया.''

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राजशेखरन का शेयर किया यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में दिख रहे लोग मलयालम में बात कर रहे हैं और यूथ कांग्रेस ज़िंदाबाद के नारे लगा रहे हैं.

रविवार रात कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इसकी निंदा की. उन्होंने ट्वीट किया, "केरल में कल जो भी हुआ, वह एक बर्बर, विचारहीन और पूरी तरह से अस्वीकार्य कदम है. कांग्रेस पार्टी और मैं, इसकी कड़ी निंदा करते हैं."

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इससे पहले कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था, ''ये वीडियो सही है या ग़लत, इसकी जांच की जानी चाहिए कि ये लोग कांग्रेस से हैं भी या नहीं. अगर किसी ने क़ानून का उल्लंघन किया है तो कांग्रेस उसका साथ नहीं देगी."

सोशल मीडिया पर मवेशी मामले की चर्चा

ट्विटर पर #गउ_हत्यारी_Congress टॉप ट्रेंड रहा. हालांकि इस हैशटैग के साथ ट्वीट करने वाले ज्यादातर लोग बीजेपी समर्थक हैं.

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Image caption अर्णब गोस्वामी नाम के पैरोडी अकाउंट से किया गया ये ट्वीट

इस मामले पर दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा ने लिखा, ''कांग्रेस ने गाय नहीं काटी, बल्कि 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने का काम किया है.''

कुछ ट्विट्स में यह दावा किया जा रहा है कि कांग्रेस ने केरल में बीफ़ बैन के विरोध में बीफ़ पार्टी का आयोजन किया.

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केरल विद कांग्रेस नाम के एक ट्विटर हैंडल से कुछ तस्वीरें री-ट्वीट की गई हैं. ये तस्वीरें कैप्शन में बीफ़ पार्टी की बताई जा रही हैं. हालांकि इन तस्वीरों की पुष्टि नहीं हो सकी है.

संघ विचारक प्रोफ़ेसर राकेश सिन्हा ने लिखा, "हर छोटी हरकत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी से ट्वीट की मांग करने वाले अब चुप क्यों हैं. क्या केरल की घटना ने उन्हें गूंगा बना दिया है?"

फ़ेसबुक पर आदित्य चौधरी ने लिखा, "केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में केरल के कांग्रेसियों ने सरेआम एक गाय को काटकर अपना विरोध जताया. समझ नहीं आता कि इस पार्टी को 44 से 4 होने की इतनी जल्दी क्यों है?"

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@ShefVaidya हैंडल से शेफ़ाली वैद्य ने लिखा, "पशुओं के अधिकारों पर बात करने वाले, जो बैलों के लिए जल्लीकट्टू को बर्बर बता रहे थे. वो केरल में हुई इस घटना पर बिल्कुल चुप हैं."

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लेखिका संजुक्ता बासु ने लिखा, "मैं इसे लेकर उलझन में हूं. क्या केरल में गौ हत्या हमेशा से क़ानूनी नहीं थी? इसमें नया क्या है? हालांकि सरेआम ऐसे करना थोड़ा ज़्यादा ही हो गया."

कहां से शुरू हुआ विवाद?

यह विवाद केंद्र सरकार के पशु क्रूरता निरोधक अधिनियम के बाद हो रहा है.

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के जारी किए 'द प्रीवेंशन ऑफ़ क्रुएलिटी टू एनिमल्स (रेगुलेशन ऑफ लाइवस्टॉक मार्केट्स) नियम 2017' के गजट नोटिफ़िकेशन को लेकर केरल के सीएम विजयन ने पीएम नरेंद्र मोदी को भी खत लिखा था.

इस नियम के ज़रिए केंद्र सरकार ने बूचड़खानों के लिए मवेशियों की ख़रीद-फ़रोख़्त पर रोक लगा दी है.

सरकार का तर्क है कि बाज़ार से जानवर ख़रीदने और बेचने वालों को अब ये बताना होगा कि जानवर को कत्ल करने के लिए नहीं खरीदा जा रहा.

विजयन ने मोदी को ख़त में क्या लिखा?

  • केरल समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों में मांस खाने वाले लोगों की संख्या शाकाहारी लोगों से ज्यादा है.
  • नए नियमों को लागू करने से पहले राज्यों से भी इस बारे में राय लेनी चाहिए थी.
  • राज्यों का भरोसा जीतने की कोशिश ना करना एक घातक कदम है जिसके दूरगामी नतीजे होंगे और ये हमारे गणतंत्र के लिए सही नहीं है.

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