सोशल: क्यों उठ रही है भारत में द्रविडनाडु बनाने की मांग?

  • 29 मई 2017
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Image caption दिल्ली में तमिल किसानों ने हाल ही में किया था प्रदर्शन. ये तस्वीर चेन्नई में उसी वक्त की है

क्या भारत से आज़ादी सिर्फ कश्मीरियों की मांग है?

जवाब हवाओं में बह रहा है! या यूँ कहें कि सोशल मीडिया एक ओर इशारा तो कर रहा है.

1940 में जस्टिस पार्टी के ईवी रामास्वामी 'पेरियार' ने दक्षिण भारत के राज्यों को मिलाकर द्रविडनाडु की मांग की थी.

पहले ये मांग सिर्फ़ तमिलभाषी क्षेत्रों के लिए थी. लेकिन बाद में द्रविडनाडु में आंध्र प्रदेश, केरल, कर्नाटक, ओडिशा और तमिलनाडु को भी शामिल करने की बात कही गई.

यानी मांग ये थी कि दक्षिण भारत के राज्यों को मिलाकर एक नया मुल्क बनाया जाए, द्रविडनाडु.

Image caption द्रविड अभियान के नेता अन्नादुरई और पेरियार

अब द्रविडनाडु पर बात क्यों?

ट्विटर पर सोमवार को #dravidanadu टॉप ट्रेंड रहा. इस हैशटैग के साथ काफी संख्या में लोग द्रविडनाडु बनाने की मांग कर रहे थे.

'रमज़ान पर जानवर की ख़रीद-फरोख़्त पर रोक सही नहीं'

'इस पार्टी को 44 से 4 होने की इतनी जल्दी क्यों है?'

कुछ ही दिन पहले भारत सरकार ने पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम की एक धारा में बदलाव किया है. इसके बाद जिन मवेशियों की मवेशी बाज़ार से ख़रीद होती है उनको मारा नहीं जा सकता है. इस नियम का दक्षिण भारत में विरोध हो रहा है.

हालाँकि केंद्र सरकार ने अपनी प्रेस रिलीज़ में कहा है कि इसका मक़सद बूचड़खानों के लिए मवेशियों की ख़रीद-फ़रोख़्त को रेगुलेट करना नहीं है बल्कि मवेशियों को क्रूरता से बचाना है.

सरकार का कहना है कि बाज़ार से जानवर ख़रीदने और बेचने वालों को अब ये बताना होगा कि जानवर को कत्ल करने के लिए तो नहीं खरीदा जा रहा.

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Image caption विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी में पहना ये मास्क

केंद्र सरकार का दक्षिण में विरोध?

केरल के मुख्यमंत्री पिन्नाराई विजयन ने पीएम मोदी को खत लिखकर इसका विरोध जताया है.

केरल यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ताओं के एक बछड़ा काटने का वीडियो भी वायरल हुआ. दक्षिण भारत के कई इलाकों में इसके विरोध में बीफ पार्टियां आयोजित की गईं.

यानी ये मामला अब कुछ लोगों के लिए उत्तर भारत बनाम दक्षिण भारत हो गया है. ऐसे में सोशल मीडिया पर द्रविडनाडु ट्रेंड कर रहा है.

द्रविडनाडु, USSI की मांग, क्या बोले जानकार

बीबीसी तमिल से बात करते हुए मलयाली पत्रकार सैफुद्दीन ने कहा, ''केरल में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई बीफ पसंद करते हैं. ये मलयाली लोगों की संस्कृति का हिस्सा है. कोई भी इसके खिलाफ लिया फैसला नहीं मानेगा. इसी वजह से द्रविड राष्ट्र और यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ साउथ इंडिया (USSI) ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है.''

वरिष्ठ लेखक गंगाधरन ने कहा, ''केंद्र सरकार का मवेशी की खरीद फरोख्त के लिए जारी किया नया नियम इस मांग की वजह है. केरल में हिंदू बीफ खाते हैं. मैं हिंदू हूं. मेरा परिवार सालों से बीफ खा रहा है और केरल के लोग भी इस पर किसी तरह की रोक को नहीं मानेंगे.''

'देश को बांटने का षडयंत्र, द्रविडनाडु'

दिनेश जिंदल ने फ़ेसबुक पर लिखा, ''देश को बांटने का षडयंत्र हो गया है. देश के टुकड़े को द्रविडनाडु बनाने की मांग उठाने की चिंगारी जल गई.''

कैलाश ओझा लिखते हैं, ''दक्षिण के पांच राज्य तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश के लोग भारत से अलग राष्ट्र बनाने की मांग कर रहे हैं. इन लोगों का कहना है कि मोदी सरकार सिर्फ उत्तर भारतीयों के वोट के लिए फालतू के नियम बना रही है.''

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@sindhan ने लिखा, ''ट्विटर पर द्रविडनाडु की मांग मोदी के लिए तगड़ा संदेश है कि उनका शासन और राजनीति भारत को फेल कर रही है.''

ट्विटर हैंडल @nethraa_ ने लिखा, ''मैं आइडिया ऑफ इंडिया में यकीन रखती हूं, लेकिन मोदी और उनके भगवा साथी इसे चोट पहुंचा रहे हैं. वक्त आ गया है कि द्रविडनाडु पर फिर से सोचा जाए.''

@South_Indians ने मोदी की एक तस्वीर पर लिखा, ''लोगों ने आपको भारत के विकास के लिए चुना है न कि हिंदी के लिए.''

ट्विटर पर @AmbedkarCaravan ने लिखा, ''द्रविडनाडु ट्रेंड प्यारा लग रहा है. शायद ये पहली बार है कि द्रविडनाडु पेरियार के बाद इतना ट्रेंड कर रहा है.''

कांग्रेस से जुड़ी जोथिमणि ने लिखा, ''मोदी जी, यही होता है जब सरकार बेतुके आइडिया हम पर थोपती है. हम कभी अपनी पहचान और अधिकारों का हनन आपको नहीं करने देंगे.''

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