गाय संबंधी आदेश हिंदुओं की भावना पर आधारित: जस्टिस एमसी शर्मा

  • 1 जून 2017
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"गाय को लेकर इस वक़्त देश में चल रही बहस राजनीतिक है, लेकिन मेरा आदेश न्यायिक है. दोनों में अंतर होता है. मेरा आदेश, मेरी आत्मा की भावना पर आधारित है और देश के तमाम हिंदुओं की आत्मा की भावना पर आधारित है."

राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने बीबीसी हिंदी के वात्सल्य राय के साथ फ़ोन पर बातचीत में ऐसा कहा है.

उन्होंने बुधवार को एक न्यायिक आदेश जारी कर नेपाल की तरह भारत में भी गाय को 'राष्ट्रीय पशु' बनाने की बात कही है.

इस आदेश में जस्टिस शर्मा ने राजस्थान सरकार से 'गोहत्या के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान' किए जाने की भी सिफ़ारिश की है.

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'गोहत्या के लिए आजीवन कारावास होना चाहिेए'

अपने आदेश को लेकर जस्टिस शर्मा ने कहा, "गाय हिंदुओं की माता है. भगवान कृष्ण ने भी हमेशा गाय को अहमियत दी. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी तो कहा था कि गंगा और यमुना को अब जीवित प्राणी माना जाएगा. मेरा यह आदेश उसी तरह का है."

उन्होंने यह भी कहा कि गाय की रक्षा के नाम पर हिंसा करने वाले लोगों का बचाव नहीं किया जाना चाहिए.

जयपुर की चर्चित हिंगोनिया गोशाला को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस महेश चंद्र शर्मा ने यह आदेश सुनाया है.

जस्टिस शर्मा ने कहा, "छत्तीसगढ़ और गुजरात में पहले ही गोहत्या करने वालों को उम्रकैद की सज़ा दिए जाने का प्रावधान है. सभी जगह ऐसा नियम होना चाहिए, क्योंकि लोगों में बिना डर बैठाए कोई बदलाव नहीं हो सकता. मैं नहीं जानता कि सरकार मेरी सलाह पर ग़ौर करेगी या नहीं."

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राजस्थान हाईकोर्ट की साइट पर छपे जस्टिस महेश चंद्र शर्मा के बायोडेटा में उन्हें सिविल, आपराधिक और राजस्व मामलों का एक्सपर्ट बताया गया है. बुधवार को ही जस्टिस शर्मा रिटायर भी हो गए हैं.

'मोर ब्रह्मचारी होता है'

एक भारतीय चैनल न्यूज़18 को अलग से दिया जस्टिस महेश चंद्र शर्मा का इंटरव्यू भी सोशल मीडिया पर ख़ूब शेयर किया जा रहा है.

इसमें वो कहते दिखते हैं, "भारत में मोर को भी राष्ट्रीय पक्षी सिर्फ इसलिए बनाया गया है, क्योंकि वह जिंदगी भर ब्रह्मचारी रहता है."

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वीडियो में उन्हें कहते सुना जा सकता है कि मोर के आंसुओं से मोरनी गर्भवती होती है. दोनों कभी सेक्स नहीं करते. इसीलिए भगवान कृष्ण भी मोर पंख का इस्तेमाल करते हैं. साधु संत भी इसलिए मोर पंख का इस्तेमाल करते हैं.

तमाम वेदों और धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए जस्टिस शर्मा ने कहा कि गाय के दूध से सब प्रकार की बीमारियां समाप्त होती हैं. धार्मिकता बढ़ती है. तांत्रिक प्रयोग के लिए भी गाय काम में आती है.

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