सोशल: 'आग में घी का काम करेंगे राहुल गांधी'

  • 8 जून 2017
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मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. इससे पहले तमिलनाडु के किसानों ने भी दिल्ली में आकर खोपड़ी और मुंह में चूहे रखकर प्रदर्शन किया था.

किसानों की मांग है कि कृषि के लिए लिए गए कर्ज़ को माफ़ किया जाए और उनके उत्पाद को सही समर्थन मूल्य मिले.

मध्यप्रदेश के मंदसौर में आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया और फ़ायरिंग में पांच किसानों की मौत हो गई.

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ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या मौजूदा भारत सरकार किसानों की चिंताओं को समझने में नाकाम रही है? किसानों की ऐसी हालत के लिए क्या सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं?

बीबीसी हिंदी ने बुधवार को अपने पाठकों के सामने यही सवाल रखा. इस पर बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक पन्ने पर 600 से अधिक कॉमेंट्स मिले हैं.

उनमें से कुछ चुनिंदा टिप्पणियां आप भी पढ़िए-

विमल पटेल लिखते हैं, "सरकारी कर्मचारी की सैलरी दिन पर दिन बढ़ती जा रही है और किसान को कोई फ़ायदा नहीं. सरकार को सबके बारे में सोचना चाहिए."

भास्कर मिश्रा ने लिखा, "किसान से खेतों में रोटी पैदा की करने उम्मीद तो रखते हैं, लेकिन वही किसान सड़क पर आकर हक मांगता है तो उसे बदले में गोली मिलती है."

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ज़हिदुर रहमान ने लिखा,"सरकार को उद्योगपतियों की चिंता से जब फ़ुर्सत मिलेगी तो किसान की भी सुध ले लेगी."

प्रीतपाल सिंह ने लिखा,"ये चुनाव का वक्त नहीं है इसीलिए सरकार दूसरे कामों में बिज़ी है."

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विकास सिन्हा लिखते हैं, "सरकार किसानों की नहीं सुनेगी वो अडानी-अंबानी की सुनेगी. उनका टैक्स माफ़ करेगी. किसानों का नहीं. किसान पैदा लेते हैं ग़रीबी में और मरते है ग़रीबी में. उन्हें सिर्फ़ वोट देने का अधिकार है ना कि न्याय मांगने का."

सूरज प्रकाश लाल ने लिखा, "पता नहीं देश में यह कैसा शासन है जो ग़रीबों, किसानों, मज़दूरों के हक की बात तो करता है पर वास्तविकता ये है कि ग़रीब और ग़रीब होता चला जा रहा है."

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हालांकि कुछ लोगों को इस आंदोलन में कांग्रेस की साज़िश दिखाई पड़ रही है.

विनोद कुमार लिखते हैं, "किसानों का ये आंदोलन सिर्फ़ बीजेपी शासित राज्यों में ही क्यों? क्योंकि यह कांग्रेस प्रायोजित है और जो सड़कों पर किसान दिख रहे हैं वो किसान नहीं बल्कि कांग्रेस सदस्य हैं."

राजेश चौरसिया ने लिखा, "प्रदर्शन तो कांग्रेसी कर रहे हैं. किसान तो बेचारा अपनी खेती-बाड़ी में लगा हुआ है."

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उधर, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी किसान आंदोलन में शामिल किसानों के परिजनों से मिलने के लिए गुरुवार को मंदसौर जाने की कोशिश कर रहे थे, पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक लिया और गिरफ़्तार कर लिया.

कुछ घंटों बाद उन्हें छोड़ दिया गया जिसके बाद को मृत किसानों के परिवारों से मिलने पहुंचे.

मंगलवार को मंदसौर में किसानों पर हुई फ़ायरिंग के दो दिन बाद राहुल गांधी की यात्रा से किसानों को कुछ फ़ायदा होगा या नहीं. इस पर बीबीसी हिंदी ने पाठकों से राय मांगी.

ओम प्रकाश गोदारा लिखते हैं,"किसानों के फ़ायदे की बात होती तो 60 सालों में किसानों कि ये हालत होती भी नहीं."

गुरुदेव नानावर ने लिखा, "कोई भी फ़ायदा नहीं होगा किसानों की बेहाली के लिए कांग्रेस और बीजेपी बराबर की ज़िम्मेदार हैं."

राकेश ठाकुर लिखते हैं राहुल गांधी, "आग में घी का काम" करेंगे.

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हरेकृष्ण दास ने लिखा, "अगर कांग्रेस डर्टी पॉलिटिक्स करती है तो बीजेपी वाले किसान को गोली मारकर क्या साबित करते हैं."

सैय्यद आमिर अब्बास रिज़वी, "नुकसान क्या होगा? जिन हत्याओं को सरकार छुपाना चाहती है, वो हत्याएं उजागर होंगी."

ऐतमद ख़ान लिखते हैं, "किसानों की कोई सुन नहीं रहा है राहुल साथ होंगे तो किसानों के हक की बात होगी."

अशोक शर्मा के अनुसार इससे "किसानों में नई ऊर्जा का संचार होगा."

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