सोशल: अब किसे चुनेंगे 'सेक्युलर बिहारी' बनाम 'कम्यूनल बाहरी'?

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विपक्षी दलों ने एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के मुक़ाबले पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को मैदान में उतारकर राष्ट्रपति चुनाव को रोचक बना दिया है.

दलित नेता मायावती ने मीरा कुमार के नाम पर रज़ामंदी जताई है. पार्टी की ओर से सतीश मिश्रा ने बयान जारी कर कहा है कि विपक्षी दलों की बैठक के बाद मीरा कुमार का नाम हमारी पार्टी सुप्रीमों को पसंद है.

लालू ने भी इसके बाद एक बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार से उन्होंने मीरा कुमार को समर्थन देने की अपील की है. इस बारे में नीतीश पुनर्विचार करेंगे.

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Image caption राष्ट्रपति चुनावः जदयू ने कहा- कोविंद का करेंगे समर्थन

ट्विटर पर विपक्षी दलों के नेता मीरा कुमार को उनके राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर चुने जाने पर बधाई दे रहे हैं.

इसे लेकर ट्विटर और फ़ेसबुक यूज़र्स में भी जमकर चर्चा हो रही है.

'सेक्युलर बिहारी' बनाम 'कम्यूनल बाहरी'

शिशिर कुमार ने फ़ेसबुक पर लिखा है कि सबसे बड़ा सवाल अब नीतीश कुमार की पसंद को लेकर होगा. वो अब किसे समर्थन देंगे? एक 'सेक्युलर बिहारी' को या 'कम्यूनल बाहरी' को?

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शिशिर को जवाब देते हुए सुनील कुमार ने लिखा है कि जो आदमी अपने बयान से पलट जाए, उसे क्या कहा जाता है, आप जानते ही हैं.

'सभी की राष्ट्रपति की जाति में दिलचस्पी'

भरत शुक्ला ने कमेंट किया है कि देश में राष्ट्रपति चुना जा रहा है या फिर मज़ाक हो रहा है. किसी का भी उम्मीदवारों की योग्यता पर ध्यान नहीं है. सभी की दिलचस्पी उनकी जाति में है. काश हमें कलाम जैसा ही कोई राष्ट्रपति मिल पाता.

'कभी कांग्रेस ने नाराज़ थीं मीरा कुमार'

शैलेश जैन ने फ़ेसबुक पर लिखा है, "कुछ वक़्त पहले अपनी उपेक्षा से नाराज़ होकर मीराकुमार ने भाजपा में जाने का मन बना लिया था. अब कांग्रेस को इन्हें राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित करना पड़ रहा है. वक्त वक्त की बात है."

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चतुर्भुज नीलकंठ चतुर्वेदी ने मीरा कुमार की तारीफ़ में लिखा है कि मीरा कुमार एक मृदुभाषी, पूर्व लोकसभा स्पीकर और भूतपूर्व राजनयिक हैं. उनके सामने रामनाथ कोविंद की पात्रता कमज़ोर दिखती है.

अमर अनस ने लिखा है कि मीरा कुमार का विरोध करने वाले को अब पक्का एंटी-दलित माना जाएगा.

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