सोशल: 'पाप इनके पालतू करें और दुहाई बापू, विनोबा की'

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Image caption पीएम मोदी

गुजरात के साबरमती में गुरूवार को पीएम मोदी ने गोभक्ति के नाम पर हो रही हत्याओं पर एक कड़ा बयान दिया.

उन्होंने कहा, "गोभक्ति के नाम पर हो रही हत्याएं स्वीकार्य नहीं है. ये ऐसी चीज़ नहीं है जिससे महात्मा गांधी सहमत होते."

गोभक्ति के नाम पर हिंसा करने वालों के लिए पीएम मोदी का यह अब तक का सबसे सख़्त बयान बताया जा रहा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया में ख़ूब चर्चा हो रही है.

'मोदी ने दिखाई हिम्मत'

तमाम लोग ऐसे हैं जो पीएम मोदी के इस भाषण को एक साहसिक कदम कह रहे हैं. लेकिन ऐसा कहने वालों की संख्या भी कम नहीं है कि #NotInMyName प्रदर्शन के दबाव में मोदी ने अपने भाषण में गोरक्षकों को हिदायतें दीं.

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अफ़लातून अफलू ने फ़ेसबुक पर लिखा है, "पाप इनके पालतू करें और दुहाई बापू, विनोबा की."

'हाथी के दांत...'

वहीं जसप्रीत ने लिखा, "हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और. देखना तो यह है कि जमीन पर इससे क्या बदलेगा."

फ़ेसबुक पर ही वमीक़ ने लिखा है, "ये आदत पुरानी है. मुंह में गांधी जी और बगल में नाथूराम."

'अरे, चुनाव है क्या?'

फ़हाद मिर्ज़ा बेग ने लिखा है, "आख़िर गुजरात में चुनाव भी तो आने वाले हैं."

Image caption #NotInmyName प्रदर्शन की एक तस्वीर

अमित शौकीन ने लिखा है कि एक दिन के प्रदर्शन ने ही मोदी काका को गांधी बापू की शरण में पहुंचा दिया. वाह! क्या बात है.

'गांधी तो ये भी न होने देते...'

समर अनार्य ने लिखा है, "गाँधी जी तो ऐसे हत्यारों को तिरंगे में लपेटने और उन लपेटने वालों में से एक को भी अपने मंत्रिमंडल में होने की इजाजत न देते!"

रमन कुमार ने लिखा है कि क्या यह मोदी की घर वापसी है?

ट्विटर पर @RoflGandhi_ हैंडल ने लिखा है, "महीने में एक दो बार मुसलमानों की लिंचिंग तो चलती है. लेकिन गोरक्षक अब मेरे वोट बैंक में शामिल दलितों को भी पीट रहे हैं. ये तो काम ख़राब हो गया."

भाषण में मोदी ने और क्या कहा-

  • समाज में हिंसा की कोई जगह नहीं है.
  • हम कैसे लोग हैं गाय के नाम पर इंसान को मारते हैं.
  • क्या किसी इंसान को मारने का हक़ मिल जाता है, क्या ये गोरक्षा है?
  • आज जब मैं सुनता हूं कि गाय के नाम पर किसी की हत्या की जा रही है. वो निर्दोष है कि नहीं क़ानून क़ानून का काम करेगा, इंसान को क़ानून हाथ में लेने का हक़ नहीं है.
  • हिंसा समस्याओं का समाधान नहीं है.
  • किसी ने गायों को बचाने के बारे में इतना नहीं बोला जितना महात्मा गांधी और विनोबा भावे बोले.

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