मुसलमान क्यों फैला रहे हैं डोनट के 'हराम' होने की अफ़वाह?

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मुसलमान डोनट नहीं खाते, ऐसी अफ़वाह फिर सोशल मीडिया पर फैल रही है.

लेकिन ख़ुद मुसलमान ऐसी अफ़वाह फैला रहे हैं. 'इस्लामोफोबिया' यह उनका मज़ाकिया जवाब है.

डोनट्स के 'हलाल' न होने का दावा ट्विटर पर सबसे पहले 2014 में किया गया था. बीते तीन साल में यह दावा मज़ाक में दोहराया जाता रहा है.

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सुअर का मांस फेंके जाने का जवाब

जनवरी 2016 में जब सुअर के मांस के टुकड़े कुछ मस्जिदों के बाहर मिले थे, तब इसी तरह का एक चुटकुला ट्वीट किया गया था.

2012 में मलेशिया में मस्जिदों के बाहर भारी मात्रा में सुअर का मांस पाया गया था. अप्रैल 2015 में ब्रिटेन के सॉलिहल की एक इमारत के बाहर सुअरों के सिर पाए गए थे. दावा था कि मुसलमान इस इमारत का अवैध रूप से नमाज़ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. 2016 में एक शख़्स पर ब्रिस्टल की एक मस्जिद के बाहर बेकन (सुअर का मांस) सैंडविच फेंकने का आरोप लगा था.

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कंफ्यूज भी हो रहे हैं लोग

लोग इन्हीं घटनाओं के जवाब में लिख रहे हैं कि डोनट हराम है और नफ़रत करने वालों को हम पर डोनट फेंकने चाहिए. ज़ाहिर है, ये ताज़े ट्वीट व्यंग्य के तौर पर ही किए जा रहे हैं, लेकिन ट्विटर यूजर्स इनसे कंफ्यूज भी हो रहे हैं. एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, 'मैं सिर्फ पूछ रहा हूं. वे हराम कैसे हैं?'

ऐसे ट्वीट्स से ग़ैर-मुसलमानों में जिज्ञासा दिख रही है और वे इसकी वजह जानना चाहते हैं. ऐसे ही एक ट्वीट के जवाब में एक यूज़र ने लिखा है, 'ओह नहीं. ये जायज़ नहीं है.'

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'डोनट्स को बख़्शा नहीं जा सकता'

2016 की शुरुआत में पत्रकार मुर्तज़ा हुसैन ने एक मज़ाकिया ट्वीट का स्क्रीनशॉट साझा किया था, जिसके बाद रेडिट यूजर्स ने भी इन अफ़वाहों पर चर्चा की थी.

जवाब में एक यूज़र ने लिखा था, 'मुझे कबाब से नफ़रत है दोस्तों! हमारी मस्जिदों तक कबाब न भेजें. ख़ास तौर से वो सींक वाले और बड़े वाले, वो जूसी ग्रिल सीज़निंग वाले.'

एक और कमेंट में कहा गया, 'ग्लेज़्ड डोनट्स सबसे ख़राब होते हैं. और उन्हें बिल्कुल नहीं बख़्शा जा सकता, ख़ास तौर से अगर वो 12 के समूह में गरमागरम सामने आ जाएं.'

एक और शख़्स ने एक स्थानीय ख़बर का मज़ाक उड़ाया, जिसमें फोटोशॉप के इस्तेमाल से दिखाया गया था कि एक स्कूल के बाहर डोनट फेंके गए हैं.

पैरोडी फ़ेसबुक अकाउंट 'मॉरडोर फर्स्ट' ने 2016 के आख़िर में एक डोनट जोक साझा किया था. यह एक तस्वीर थी, जिसमें डोनट पर फिल्म 'लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स' की 'ब्लैक स्पीच' के अक्षरों से कुछ लिखा गया था, लेकिन इसे मज़ाक में 'मुस्लामिक लेखन' कहा गया था.

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इस तस्वीर को 11 हज़ार से ज़्यादा बार शेयर किया गया था. लेकिन ये पुख़्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता कि कितने लोग इस चुटकुले को समझ पाए और कितनों ने इसे सच मानकर शेयर किया.

'ताकि डोनट्स फेंके जाएं'

इस साल डोनट वाली अफवाह फैली तो इस पर ट्वीट करने वालों में पत्रकार मेहदी हसन भी शामिल थे. 30 जून को उन्होंने लिखा था, 'मेरा हमेशा से ये मानना था कि मुसलमानों को ये अफवाह फैलानी चाहिए कि डोनट्स हराम हैं, ताकि उन पर डोनट्स के ज़रिए हमला किया जाए.'

पत्रकार मुर्तज़ा हुसैन की ओर से इसी चुटकुले को शेयर किए जाने के बाद रेडिट पर चुटकुले शुरू हो गए और लोग बताने लगे कि और कौन-कौन सी चीज़ें प्रतिबंधित होनी चाहिए. इस तरह बीते हफ़्ते फेसबुक पेज 'Mvslim' पर 6 हज़ार से ज़्यादा प्रतिक्रियाएं आईं.

इसी पर एक कमेंट था, 'मुझे स्टारबक्स से नफ़रत है. ताकीस, पित्ज़ा, कुकी डो (जिसे आप कच्चा ही खा सकते हैं), ट्विक्स, आईफ़ोन, प्लेस्टेशन 4 और मैं चिपोतले बर्दाश्त नहीं कर सकता. प्लीज, मुझे इन चीज़ों से बेइज़्ज़त करो.'

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