क्यों नहीं कहते कि हिंदू होने की वजह से मारे गए: चेतन भगत

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अमरनाथ यात्रियों पर हुए चरमपंथी हमले के बाद सोशल मीडिया में भी तीखी प्रतिक्रिया है.

एक ओर लोग जहां इसे हिंदुओं पर हमला बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर सुरक्षा ख़ामियों पर भी गुस्सा प्रकट कर रहे हैं.

लेखक चेतन भगत ने सवाल किया, "जब जुनैद की मौत हुई तो मीडिया ने कहा कि उसे मुसलमान होने की वजह से मारा गया. तो फिर ये क्यों न कहा जाए कि जो लोग अमरनाथ हमले में मरे हैं उन्हें हिंदू होने की वजह से मारा गया."

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चेतन भगत को जवाब देते हुए वेद ने लिखा, "लेकिन एक फ़र्क है. जुनैद को सामान्य सहयात्री नागरिकों ने मारा था. अमरनाथ पर हमला चरमपंथियों ने किया है जिनमें विदेशी भी हो सकते हैं. समझे?"

देबाशीष बहरुआ ने चेतन भगत को जवाब देते हुए लिखा, "लेकिन जुनैद के क़ातिलों को किसी ने आतंकवादी भी नहीं कहा. वो कथित आतंकवादी भीड़ हैं. "

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ऐसी वारदातों को बाद सरकार में शामिल मंत्री निंदा करते हुए ट्वीट करते हैं. इसे लेकर भी सोशल मीडिया में रोष है.

'कड़ी निंदा' हैशटैग के साथ लोगों ने ट्वीट करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह से इस्तीफ़ा तक मांग लिया.

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सर रवींद्र जडेजा के नाम से चल रहे अकाउंट से लिखा गया, "गृहमंत्री जी, बहुत हो गई कड़ी निंदा, अगर आप भारत के लोगों को सुरक्षा नहीं दे सकते तो पद छोड़ दीजिए."

अंशुल सक्सेना ने ट्वीट किया, "पहला दिन- कड़ी निंदा. दूसरा दिन- राजनीति. तीसरा दिन- गुस्सा. चौथा, पांचवा, छठा दिन- मीडिया में बहस. सातवां दिन- नया विषय शुरू."

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अकरम शकील ने फ़ेसबुक पर लिखा, "घायलों का हालचाल लेने गयीं महबूबा ने हाथ जोड़कर माफ़ी माँगते हुए घायलों से कहा, बताइए आप हमारे यहाँ आए और हमने आपके साथ क्या किया. कुछ क़दम उठाने के बजाय कभी रो देना कभी हाथ जोड़ लेना और कभी कड़ी निंदा कर देना. सरकारों में ये सब 'बेबसी' खतरनाक है. क्योंकि इस बेबसी से मारा गया कोई भी शख़्स वापस नहीं आता."

उपासना झा ने फ़ेसबुक पर लिखा, "कड़ी निंदा से काम चलाइए, उससे न हो तो कहिये बस नियमों को तोड़ रही थी, उससे भी न काम चले तो कहिये की कुछ 'भटके हुए नौजवानों' ने हमला कर दिया.

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