रूस: 'गे जैसा' दिखने की वजह से नहीं मिली नौकरी, देना पड़ा हर्जाना

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''हम आपको नौकरी पर नहीं रख सकते क्योंकि आप गे जैसे दिखते हैं. आप बहुत सज-धजकर रहते हैं और आपके हाव-भाव लड़कियों जैसे हैं.''

रूस के एडवर्ड मायरा जब एक सेल्स असिस्टेंट की नौकरी मांगने गए तो उन्हें यही जवाब सुनने को मिला. एडवर्ड ने पिछले साल खिलाड़ियों के लिए खाने का सामान और एनर्जी ड्रिंक बेचने वाले स्टोर एलएलसी हार्डकोर में नौकरी के लिए अर्ज़ी डाली थी. वो इंटरव्यू तक भी पहुंचे लेकिन उसके बाद उन्हें नौकरी नहीं मिली.

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एडवर्ड ने स्टोर से फ़ीडबैक मांगा और पूछा कि उन्हें नौकरी क्यों नहीं दी गई. इस पर कंपनी के एचआर की तरफ़ से जो जवाब आया, वो हैरान कर देने वाला था. जवाब में साफ़-साफ़ कहा गया था कि उन्हें नौकरी पर इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि वो 'गे जैसे' दिखते हैं.

उन्हें एक चिट्ठी भेजी गई जिसमें लिखा था कि उनके तौर-तरीकों से लगता है कि वो गे हैं. चिट्ठी में यह भी कहा गया कि वह 'कुछ ज़्यादा ही' सज-धजकर आए थे, उन्हें देखकर लगता है कि वो एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल, ट्रांसजेंडर) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और यह हमारी परंपराओं के ख़िलाफ है.

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कंपनी के इस जवाब ने रूसी सोशल मीडिया में तूफान ला दिया है. एलजीबीटी ऐक्टिविस्ट भी कंपनी के 'पूर्वाग्रह' और 'भेदभावपूर्ण' रवैये खिलाफ़ खड़े हो गए हैं.

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समलैंगिक होने को ग़लत क्यों माना जाता है

एडवर्ड ने एक न्यूज़ वेबसाइट से इस बारे में बात की. उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं पता कि उन्हें ऐसा कैसे लगा. शायद इसलिए क्योंकि मैंने कान छिदाए हैं...''

वहीं कंपनी का कहना है कि उसने यह फ़ैसला रूस के उस कानून को ध्यान में रखते हुए लिया है जो नाबालिगों में समलैंगिकता के बढ़ावे को रोकता है.

इस क़ानून को यूरोप की मानवाधिकार अदालत ने 'भेदभावपूर्ण' बताया है. लैंगिक भेदभाव पर काम करने वालों ने भी इसकी कड़ी आलोचना की है.

एडवर्ड ने स्टोर के ख़िलाफ़ क़ानूनी कदम उठाया और 50 हज़ार रूबल (तक़रीबन 53 हज़ार रुपये) का मुआवज़ा मांगा. हालांकि ज़िला अदालत ने स्टोर को 30 हज़ार रूबल (लगभग 32 हजार रुपये) देने का आदेश दिया.

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हार्डकोर स्टोर के डायरेक्टर ऐंड्री चिस्ताकोव को नहीं लगता कि उनका फ़ैसला ग़लत था. उन्होंने एक रूसी अख़बार से कहा, ''मैं इसकी गारंटी नहीं ले सकता कि खिलाड़ी उन्हें देखकर क्या सोचते. हमारे ग्राहकों में 'रफ़ एंड टफ़' पुरुष होते हैं. हो सकता है कि गे सेल्स असिस्टेंट को देखकर वो असहज महसूस करें.''

रूसी सोशल मीडिया में लोग इस घटना को लेकर ग़ुस्सा और नाराज़गी जता रहे हैं. कइयों को लगता है कि इसमें स्टोर के मालिक की ग़लती नहीं थी क्योंकि रूसी अवाम ख़ुद भी उदार नहीं है. कुछ लोग इस बात से खुश हैं कि स्टोर मालिक को थो़ड़ा ही सही, लेकिन हर्जाना देना पड़ा.

माना जा रहा है कि रूस में एलजीबीटी समुदाय के अधिकारों की तरफ़ बढ़ने का यह पहला कदम है.

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