क्या सुरेश प्रभु ने पीएम मोदी को इस्तीफ़ा दिया?

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उत्तर प्रदेश में आज़मगढ़ से दिल्ली आ रही कैफ़ियत एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इशारों-इशारों में पद छोड़ने की बात कही है.

ये हादसा बुधवार की सुबह कानपुर के पास औरैया में हुआ. ट्रेन एक डंपर से टकरा गई और ट्रेन के इंजन सहित 10 डिब्बे पटरी से उतर गए.

चार दिन पहले मुज़फ्फ़रनगर ज़िले में कलिंग-उत्कल एक्सप्रैस के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए थे और इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई थी.

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सुरेश प्रभु पर लगातार हमले हो रहे थे और सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए उन्होंने अपनी बात सामने रखी.

उन्होंने ट्वीट किया, ''तीन साल से कम वक़्त में मंत्री रहते हुए मैंने रेलवे के सुधार के लिए अपना पसीना और अपना ख़ून लगाया है. प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चरणबद्ध सुधारों के ज़रिए कई दशकों की काहिली और लापरवाही को दूर करने की कोशिश की जिसमें भारी निवेश शामिल है.''

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प्रभु ने आगे लिखा, ''जिस नए भारत की संकल्पना प्रधानमंत्री ने देखी है उसमें रेलवे आधुनिक और प्रभावशाली है. मैं वादा करता हूं कि रेलवे फिलहाल इसी पथ पर आगे बढ़ रहा है.''

उन्होंने ट्वीट किया, ''मैं दुर्भाग्यपूर्ण हादसों, यात्रियों के घायल होने और बेशकीमती जान गंवाने की वजह से आहत हूं. इससे मुझे गहरा दुख पहुंचा है.''

रेल मंत्री ने आगे जो लिखा, उससे संकेत मिलता है कि उन्होंने शायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष अपना पद छोड़ने की पेशकश की थी.

प्रभु ने लिखा, ''मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की और (इन हादसों की) पूरी ज़िम्मेदारी ली. माननीय प्रधानमंत्री ने मुझे इंतज़ार करने को कहा है.''

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इंतज़ार करने के मायने क्या हैं, ये फिलहाल रहस्य बना हुआ है. ख़बर लिखे जाने तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सिलसिले में ट्विटर पर कुछ नहीं लिखा था.

विपक्षी दल रेल हादसों को लेकर लगातार रेल मंत्री पर हमला बोल रहे हैं.

सुरेश प्रभु के रेल मंत्री बनने के बाद होने वाले छह बड़े रेल हादसे हो चुके हैं जिनमें ये शामिल हैं:

  • 13 फरवरी 2015: बंगलुरू सिटी-इर्नाकुलम इंटरसिटी एक्सप्रैस ट्रेन के 9 डिब्बे अनेकल के पास पटरी से उतर गए थे, 9 लोग मारे गए थे.
  • 20 मार्च, 2015: देहरादून से वाराणसी जा रही जनता एक्सप्रेस पटरी से उतर गई थी. इस हादसे में 34 लोग मारे गए थे.
  • 4 अगस्त 2015: मध्यप्रदेश में कुरावन और भृंगी स्टेशन के बीच कामायनी एक्स्प्रैस और जनता एक्सप्रैस पटरी से उतर गई थी, 31 लोग मारे गए थे.
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  • 20 नवंबर 2016: कानपुर के पास पुखरायां में एक बड़ा रेल हादसा हुआ जिसमें कम से कम 150 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई.
  • 22 जनवरी 2017: आंध्रप्रदेश के विजयनगरम ज़िले में हीराखंड एक्सप्रेस के आठ डिब्बे पटरी से उतरने की वजह से क़रीब 39 लोग मारे गए.
  • 19 अगस्त 2017: मुज़फ्फ़रनगर ज़िले में कलिंग-उत्कल एक्सप्रैस के 13 डिब्बे पटरी से उतरे. 21 लोगों की मौत, 200 से ज़्यादा लोग घायल.

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