सोशल: 'एक बाबा तो हिंदुस्तान वालों से संभाला नहीं जा रहा है'

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सीबीआई की विशेष अदालत के डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी क़रार दिए जाने से बाद से पंचकुला में भीषण हिंसा शुरू हो गई है.

अब तक हिंसा में 23 लोगों की मौत हो चुकी है और हिंसा की लपटें हरियाणा से सटे दिल्ली, राजस्थान तक पहुंच चुकी हैं.

अपने फ़ेसबुक पन्ने पर बीबीसी ने हिंसक प्रतिक्रिया और प्रशासन की लाचारी पर अपने पाठकों से राय देने के लिए कहा.

पढ़िए कुछ पाठकों की राय-

अज़ान ख़ान लिखते हैं, "चीन के लोग हंस हंस के लोटपोट हो रहे हैं एक बाबा तो हिंदुस्तान वालों से संभाला नहीं जा रहा है."

परवेज़ शिवानी लिखते हैं, "किसी महिला का बलात्कार हुआ तो आप किसके लिए सड़क पर उतरेंगे? बलात्कारी के लिए या या जिसका बालात्कार हुआ हो उसके लिए. यहाँ सब उल्टा दिख रहा है. एक बलात्कारी को ज़ेड प्लस सिक्योरिटी भी मिली हुई है. यही वो उदाहरण है बेटी बचाओ और बेटी पढाओ का."

मूलराम पूनिया ने लिखा, "आज कुछ भी हरियाणा में घटित हो रहा है उसके पीछे बाबा के अंधभक्तों से ज़्यादा हरियाणा की अनुभवहीन और वोट बैंक के पीछे लाचार खट्टर सरकार है."

डॉली कुमारी ने लिखा, "समर्थकों पर पैलेट गन का इस्तेमाल हो."

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यूएस नेगी ने लिखा, "प्रशासन की ग़लती है. जब धारा 144 लागू थी तो लाखों लोग एक साथ इकठ्ठे कैसे हो गये. फिर तो धारा 144 का कोई औचित्य नहीं रह गया."

प्रवीण मिश्रा ने लिखा, "हरियाणा में आज की हिंसा का बच्चे-बच्चे को कई दिन से अंदेशा था. लेकिन शायद, खट्टर साहब अपने बाबा रामरहीम के आश्वासनों पर भरोसा करके फजीहत करवा बैठे."

कुसुम शर्मा ने लिखा, "कोर्ट का फ़ैसला भक्तों को मानना चाहिए. उस महिला के लिए इनको सड़कों पर उतरना चाहिए था."

सलाउद्दीन ख़ान का कहना है, "आज मीडिया को पता चला अंधभक्ति का परिणाम."

रेहान पठान ने लिखा, "ऐसा लगता है सरकार ने खुली छूट दे रखी है गुंडों को."

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