सोशल: लोगों ने बताया, इन बाबाओं में ऐसा क्या है जो दीवाना बना लेता है?

गुरमीत राम रहीम सिंह को सजा सुनाए जाने पर उनके अनुयायियों ने हंगामा कर दिया. हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ हुई. इतना ही नहीं, कई लोगों की जानें भी गईं.

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डेरा प्रमुख के समर्थक ये बात मानने को तैयार ही नहीं हैं कि उनके बाबा को अदालत ने बलात्कार के लिए दोषी क़रार दिया.

यह दीवानगी अकेले गुरमीत राम रहीम के लिए नहीं है. आसाराम के अनुयायी हर हफ़्ते #बापूजीनिद्रोषहैं जैसे हैशटैग चलाकर उन्हें रिहा किए जाने की मांग करते रहते हैं.

कुछ यही हाल रामपाल, राधे मां और ऐसे तमाम तथाकथित धर्मगुरुओं के समर्थकों का है. आख़िर क्या है इस दीवानगी की वजह? भारतीय समाज में लोग ऐसे बाबाओं पर इतना भरोसा क्यों करते हैं? बीबीसी हिंदी ने 'कहासुनी' के ज़रिए इसी सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश की. हमने अपने पाठकों से इस दीवानगी की वजह के बारे में पूछा.

सवाल के जवाब में फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लोगों ने बढ़-चढ़कर अपनी राय जाहिर की. हरिओम दिवाकर ने फ़ेसबुक पर लिखा, ''सबसे बड़ा कारण अशिक्षा है. जिसके कारण लोग सोच ही नही पाते हैं कि क्या सही है और क्या ग़लत. ऐसे लोग अंधभक्त बन जाते हैं, जिसका पूरा फ़ायदा नेता और बाबा उठाते हैं.''

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शशि त्रिपाठी को लगता है कि ये कोई दीवानगी नहीं है. असल में चंद लोग भोले-भाले लोगों को अपने मतलब के लिए लालच देकर फंसा देते हैं, उनकी दुखती रग़ पकड़ लेते हैं और फिर इनकी बात मानना लोगों की मजबूरी बन जाती है. आयशा ख़ान कहती हैं कि जरूरत से ज्यादा पाखंड और अंधविश्वास की वजह से ऐसा होता है.

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निशा मेहरा इसके पीछे के मनोवैज्ञानिक कारण को कुछ इस तरह समझाते हैं, ''अभावों में जीते लोगों के लिए भगवान जैसा कॉन्सेप्ट अंतिम सहारा जैसा होता है. चूँकि ये ढोंगी संत भक्तों का इतना ब्रेनवाश कर देते हैं कि वो इनको ही भगवान या भगवान तक डायरेक्ट पहुँच रखने वाला मान लेते हैं! धार्मिक व्यक्ति के लिए भगवान सवालों से, संदेह से, ग़लती से परे होता है इसलिए भक्त इन स्वघोषित गॉडमैन को स्वाभाविक रूप से ग़लतियों और संदेहों से परे मानते हैं.''

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एक ट्विटर यूज़र का कहना है कि पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों में भगवान को लेकर डर फैलाया गया है जिसकी वजह से भारतीय लोग जल्दी भावुक हो जाते हैं और महिलाएं इसकी ज़्यादा शिकार होती हैं. शिबली ने ट्विटर पर कहा है,सरकार से बंधी उम्मीदें पूरी ना होने पर बेरोजगारी और पारिवारिक परेशानियां लोगों को बाबा के पास ले जाती हैं.''

एक पाठक ने इंस्टाग्राम पर कहा, ''हो सकता है उन लोगों का बुरा समय उसी वक्त ख़त्म हुआ हो जब वो ऐसे बाबा से मिले हों और फिर उनको लगने लगा कि ये बाबा की कृपा है.''

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अबसार इसके लिए ग़रीबी और अशिक्षा को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. उनका कहना है कि ये हमें समझने ही नहीं देतीं कि सच क्या है.

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