'मुजीब ही बांग्लादेश के राष्ट्रपिता'

Image caption शेख़ मुजीब ने ही बांग्लादेश की आज़ादी की घोषणा की थी

1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की आज़ादी की घोषणा किसने की थी- शेख़ मुजीबुर्रहमान ने या पूर्व सैनिक शासन ज़ियाउर्रहमान ने. इस सवाल पर बांग्लादेश में दोनों प्रमुख पार्टियों- अवामी लीग और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी में दशकों से विवाद चलता चला आ रहा है. मगर अब ढाका के उच्च न्यायालय ने फ़ैसला सुनाया है कि अवामी लीग की नेता और मौजूदा प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के पिता शेख़ मुजीबुर्रहमान ने ही 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की आज़ादी की घोषणा की थी न कि विपक्षी नेता ख़ालिदा ज़िया के पति ज़ियाउर्रहमान ने. बांग्लादेश में इन दोनों ही परिवारों का प्रभुत्व रहा है और ये दोनों ही परिवार इतिहास का अपना नज़रिया सामने रखते रहे हैं. साथ ही इन दोनों परिवारों को ये भी लगता है कि देश में सत्ता में होने का अधिकार तो उन्हीं को है. ऐसे में ये दोनों ही प्रमुख पार्टियाँ दावा करती रही हैं कि उनके नेता को ही बांग्लादेश का असली पिता माना जाना चाहिए. बांग्लादेश काफ़ी बुरी तरह विभाजित सा देश है और ऐसे में सत्ता इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच झूलती रही है.

आज़ादी की घोषणा

ऐसे में जब भी दूसरी पार्टी सत्ता में आती है तो इतिहास की पुस्तकें बदल जाती हैं, उन्हें नए सिरे से लिखा जाता है. अब शेख़ हसीना की अवामी लीग को मिली निर्णायक जीत के छह महीने बाद ढाका उच्च न्यायालय ने आदेश सुनाया है कि उनके पिता शेख़ मुजीबुर्रहमान ने युद्ध की शुरुआत के समय जो भाषण दिया था उसमें उन्होंने आज़ादी की घोषणा की थी. उच्च न्यायालय के अनुसार इसके अलावा जो भी दावे किए गए हैं वे सभी झूठे हैं. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की ओर से तुरंत इस फ़ैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. उसका दावा रहा है कि उसकी नेता बेग़म ख़ालिदा ज़िया के पति और पूर्व सैनिक शासक ज़ियाउर्रहमान ने एक रेडियो संदेश में स्वतंत्रता की घोषणा की थी. इस फ़ैसले के बाद निश्चित रूप से मौजूदा सरकार ये उम्मीद करेगी कि मसला हमेशा के लिए ख़त्म हो गया है पर अगर इतिहास को देखें तो लगता तो नहीं कि दोनों में से कोई भी पक्ष अपनी ग़लती मानने के लिए राज़ी होता है.